शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

कौआ चौथ व्रत

कौआ चौथ मोमबत्ती ब्रिग्रेडियों का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के सभी प्रांतो का पर्व  है। यह किसी भी समय चतुष्पद पँछधारी द्वारपाल के समान भोकने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व सेक्यूलर मानवधिक्कारी कार्यकर्ता मनाते हैं। यह व्रत किसी भी समय से सार्वजनिक स्थानों में शुरू होकर मीडिया दर्शन के बाद संपूर्ण होता है। 

ग्रामीण अनशनकारी से लेकर आधुनिक पंजीकृत बुध्दजीवियों तक सभी मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी कौआ चौथ का व्रत बडी़ निष्ठा एवं उत्साह के साथ रखते हैं। डालरशास्त्र के अनुसार यह व्रत किसी जुगाडू और शातिर ब्रिग्रेडी के फँसने पर , सत्ताधीशों को ब्लेकमेल करने के लिए अथवा अखण्ड भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ही करना चाहिए। विदेशी चंदे एवं अमरीकी डॉलर सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किसी भी शुभ दिन डॉलर देवता जी की अर्चना की जाती है। कौआ चौथ में भी बकरचंद श्वान की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में मोमबत्ती जलाकर मीडिया द्वारा टीवी में दिखाये जाने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में कौआ चौथ व्रतोत्सव ज्यादातर मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी अपने स्वयंसेवी संगठनों में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाते हैं लेकिन अधिकतर मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी निराहार रहकर डॉलर आगमन की प्रतीक्षा करते हैं।
व्रत
मेट्रोपोलिटिन शहर में जहाँ मिडिया कव्हरेज उपलब्ध हो कुकुर चौधरी (कौआ-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सेक्यूलर हरी लुँगी मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी को ही यह व्रत करने का अधिकार है। व्यक्ति किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय का हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है केवल गेरूये रंग के धोतीधारक के  लिए ये व्रत प्रतिबंधित है । जो मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी विदेशी चंदे से आमदनी व डॉलर की कामना करते हैं वे यह व्रत रखते हैं। 

यह व्रत मौका देखकर लगातार भी किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का जूस पीकर उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी आजीवन रखना चाहें वे सुविधानुसार धमकी देकर ब्रेक ले ले कर जीवनभर इस व्रत को कर सकते हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सभी मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी डॉलर अनुदान रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।

व्रत की विधि
किसी भी स्याह पक्ष की कुकुर तिथि अर्थात उस तिथि की रात्रि को जिसमें मीडिया में फूल कव्हरेज मिलने की सम्भावना सेठ हो , उस दिन प्रातः आठ दस साम्प्रदायिकता के खिलाफ धिक्कार भरे नारे याद कर अपने विदेशी डॉलर प्रदाताओं के निर्देशन में जनेऊ धोती और चुटिया को गाली गलौज करने का संकल्प लेकर दिनभर चिल्लाते रहें। 

पूजन
कौआ चौथ के एक दिन पूर्व शहनाज हुसैन के ब्यूटी पार्लर से मेकअप करवा लें फिर सुबह भरपेट पौष्टिक नाश्ता कर किसी मँहगे फैशन डिजायनर द्वारा निर्मित सफेद अर्धपारदर्शी महीन कपड़े के बाजूमुक्त बड़े गले के घेरे वाला कुर्ता एवं छिद्र युक्त लो वेस्ट जींस पहन एवं डिजायनर झोला लटकाकर चौक चौराहों पर अपनी बौध्दिक एवं शारीरिक सुंदरता का प्रदर्शन कर अंग्रेजी भाषा में लफ्फाजेदार भारी भरकम शब्दों से वाणी विस्फोटित करे और मन ही मन डॉलर देवता का स्मरण करें। पूजन करने के लिए मोमबत्ती जलाकर किसी व्यस्त चौराहे या ऐतिहासिक इमारत जिसके सामने तस्वीर अच्छी खिंचती हो एक गोल घेरा बनाकर ज्यादा से ज्यादा जलती हुई मोमबत्तियों को स्थापित करें। 

नैवेद्य
कामेडी टीवी सिरीयल्स के लिए संवाद लिखने वाले दादा कोंडके टाइप के लेखकों से कुछ शुद्ध तुकबंदी वाले नारों को रचना पूर्व से करवा लें ! हाय हाय, मुर्दाबाद, अन्याय नहीं सहेंगे, अभी तो ये अंगड़ाई है  आगे और लड़ाई (कमाई) है टाईप के नारों की सुविचार वर्णित पट्टिका और बेनर बनवा लें ! वैसे सुविधानुसार किसी मानवधिक्कारी प्रिंटिंग प्रेस में ऐसे नारों की सुविचार वर्णित पट्टिका की फ्लेक्सी रेडीमेड भी मिलती है वो भी खरीद सकते है !   

कौरवा
काली मिट्टी से सने कुछ दबे कुचले मजदूर और रिक्शा चलाने वाले कुछ साधारण भीड से दिखने वाले लोगों को मानदेय देकर इकठ्ठा करें ! यदि ऐसा करने में आप समर्थ ना हो तो आप इन्हे किराये से भी ले सकते है ! इस हेतु देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थान तीस्ता मोर्चा सप्लाई ऐजेंसी, मल्लिका बिकनी मोर्चा, नरमेधा धरना एसोसिएट्स आदि से सम्पर्क कर उचित दर पर अनुभवी कौरवा प्राप्त की जा सकती है !  

संख्‍या
ज्यादा से ज्यादा कौरवे अपनी सामर्थ्य अनुसार रखें। 

पूजन विधि
सभी कौरवों को सुविचार वर्णित पट्टिका प्रदान कर उन्हे अपने पार्श्व भाग पर कतार बध्द कर इस प्रकार धारण करायें कि सुविचार पट्टिका सर्वसाधारण को स्पष्ट रूप से दिखाई दे ! स्वयं को इस प्रकार स्थापित करें की आपका सौंदर्य प्रसाधनो से युक्त दीप्तमान मुखमण्डल और डिजायनर वस्त्र पूर्ण रूप से चौथे खम्बे (मीडिया) के निगाह क्षेत्र में रहे । 3 जी मोबाईल के द्वारा विदेशी दानदाताओं से नाड़ा बाँधकर डॉलर देवता की भावना करके निरंतर सम्पर्क स्थापित करें। पूरे पूजन के दौरान अविराम यथाशक्ति साहित्यिक शब्दों में गालीयों का प्रक्षेपण कर कौवा चौथ व्रत की कथा पढ़ें अथवा सुनें। 

सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर विदेशी अग्नि प्रज्वलन यंत्र द्वारा मोमबत्ती में अग्नि स्थापना करें और कुछ दूर पद परिचालन कर व्यस्त चौराहे या ऐतिहासिक इमारत के समक्ष उसे स्थापित कर अर्घ्य प्रदान करें। इसके पश्चात सभी छवि प्रक्षेपण अधिकारियों को सपरिवार सर्वसुविधा युक्त आश्रम में उर्जाजल सहित उत्तम भोजन कराएँ। भोजन के पश्चात उन्हे यथाशक्ति द्रव्य दक्षिणा देकर कृतज्ञता प्रकट करें । 

मोहनी माता (अर्थात राजमाता ) को सारी पूजन के दौरान बंधन मुक्त रखें और अपनी मातृभक्ति हेतु अर्पित एक लोटा, वस्त्र किसी स्वामी भग्निदोष जैसे विशेष कौरव के माध्यम से भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे विदेश प्रवास में हों तो उनके तुल्य बबलू या माता द्वारा नियुक्त किसी भाट चारण मण्डली को भेंट करें। इसके पश्चात स्वयं या परिवार के किसी अन्य योग्य वक्ता सदस्य पहले किसी चौथे खम्बे के वातानूकूलित छायागृह (मीडिया स्टूडियो) में जाकर व्रत की महिमा का बखान करें तत्पश्चात किसी सिक्स स्टार बार में जाकर देर रात्रि तक उर्जा जल ग्रहण कर व्रत तोड़े !  

इस तरह से कौवा चौथ व्रत करने पर सभी उल्लूओं से डॉलर देवता प्रसन्न होंगे एवं व्रत सफल होकर धन धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होगी ! 
बोलो मोमबत्ती प्रिय डॉलर देवता की जय !

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

छत्तीसगढ़ी सँगवारियों के लिए --तीजा स्पेशल

    घटना -1
अभी अभी शाम के फूल चौक में एक भौजी ला देख्यों ! एकदम एकता कपूर के सीरीयल के बहू ऐसन सिंन्गार करके चाटठेला में चाटवाला के गुपचुप सिराये बर भकाभक अपन योगदान देत रहीस ! मैं ओला हिम्मत करके बोलों भौजी आज तो तीजा हवे अऊर तैं एकदम सिक्सलेन नेशनल हाईवे जैसन माँग भरके , मायावती के जनमदिन के नोट के माला ऐसन मोट मोट सोना के मंगल डोरी पहेन के गुपचुप खातस उपास नई हस का !वो बडे मासूम स्टाईल में बोली ऐसन बात नई है भाई मोर सुहाग के पोस्ट हा एकदम स्थाई हवे बस ओकर अधिकारी के टाईम टाईम में ट्रांसफर होत रहिथे ! ये बरस मोर आदमी हा तीज के उपास रखे है काबर ओला चिंता है कि ऐ सीजन में कौनो दूसरा ट्रांसफर में आकर एक तरफा ज्वाईन नही कर दे !


घटना 2
मोर मितान समारू ह अपन बाई ला पूछिस ऐ रामप्यारी अबके बार तैं तीज के उपास नही रखे का ! ओकर बाई ह एकदम सेन्टीमेन्टल होके कहीस नई अब के बार मन नही लागथ हे !

समारू ह पूछिस काबर तो राम प्यारी के जबाब तुमन सब्बो संगवारी मन सुनो -

हमर गाँव के दू बाई मंगली अऊर सुन्दरी दोनो बचपन के मितान हवे ! गये साल मंगली तीजा के बरत रखे लेकिन सुंदरी नई रखे तो मंगली के आदमी के दू महिना के अंदर म रामनाम सत्य हो गईस ! ये हमर तीन घर बाद जो रमशीला के आदमी ह अब बहुत परेशान करथे ओकर खातिर इ डाहर मैं घला तीजा उपास नहीं रखों !

मगर मोर मितान सोमारू ह कोनो नानकुन आदम नई है वो बड़ आराम से एक देशी बोतल अपन शरीर के स्टोररूम में पहुँचा के मोर से बोलिस महाराज मोला कोई टेंशन नहीं हवे काबर वो शांताराम के बाई ह दू दिन के निर्जला उपास रखे है !! जय हो !!

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

लेटर टू बापू ऑन हिस बर्थडे



मेरे नेशनल फादर बोले तो बापू ...

गुड मार्निंग एंड हैप्पी बर्थ डे टू यू
 

यहाँ कुशल गुसल है मेरे सांई
वहाँ कुशल तुम जानो रघुराई 

लिखना हाल समाचार ये है कि हमे यकीन है तुम स्वर्ग में भी रहकर खुश नहीं होगे क्योंकि तुम्हे तो हमेशा से दूसरों के लिए परेशान रहने की बीमारी थी इसलिए तो शायद अच्छा खासा बैरिस्टर का काम धाम छोड़ दिया ! अपना कोट पैंट उताकर लगोंटी पहन ली और चले देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने !  

हमें यहाँ अभी अभी कुछ दिन पहले ही सरकार द्वारा 26 रूपये से ज्यादा आमदनी होने के कारण अमीर घोषित कर सम्मान दिया गया हैं इसलिए ना चाहते हुए भी कहना पड़ रहा है कि इतने बम धमाकों और भूकम्प, बाढ़, सूखा जैसे प्राकृतिक विपदाओं के होते हुए भी बंदूको के साये में सुखी एवं प्रसन्नचित्त हैं ! जाहिर है पूर्णत: अकुशल ही होंगे ! 

बापू आगे समाचार ये है कि आजकल कुछ वर्षों से मंहगाई की समस्या ही समाप्त हो गई है ! ये मुई तो अब सोकर उठने से लेकर फिर से सोने तक हमारे दिनचर्या में श्वाँस की तरह शामिल हो गई है इसलिए अब सात जन्मों की हमसफर सी लगने लगी है ! इसलिए अब जिसके साथ जीवनभर चलना हो उसे सार्वजनिक रूप से समस्या भी तो नहीं कहा जा सकता ! यदि उसे हम ऐसा कहते हैं तो ससुरी मुँहफुला कर कहती है कि हमें समस्या कहते हो, दम है तो अपनी लुगाई को भी सार्वजनिक रूप से समस्या कह कर बताओ, तो जाने असली मर्द हो ! बस क्या बाबा बंगाली जैसी अपनी कमजोरी छुपाने के लिए अब चुप ही रहते हैं !  

कल ही कलमुँही चिढ़ाकर कह रही थी आधीवाणी बाबू , खूब हमें गँभीर समस्या बता रहे थे और कह रहे थे मँहगाई ने कमर तोड़ दी ! अब अगर दम है तो यही उपाधि जरा अपनी घरवाली गुज्जी बेन को देकर देखो, सिर ही ना फोड़ दे तो कहना !

और आपसे क्या कहें बापू, आपके ये चेले चपाटों की दया है, बड़ा खयाल रखते हैं हमारा, कभी तकलीफ में कोई कमी आने ही नहीं देते ! बस जाते जाते बापू तुमसे एक शिकायत थी हो सके तो दूर कर देना !  

ये तुम्हारे चेले चपाटे तुम्हारा बर्थ डे भी ठीक से नहीं मनाने देते ! दिन भर ये मुर्दाबादी तुम्हारे नाम का टोपी पहन कर अपने आप को गाँधीवादी बताते हैं ! तुम्हारे चौक चौराहों में खुले आसमान के नीचे भीगते सुखते थ्री डायमेंशनल फिगर जिसे साल भर फ्लाईंग एनिमल अपने वॉच टॉवर के रूप में इस्तेमाल करते हैको धो पोछकर माला चढ़ा अपने आप को गौरांवित महसूस करते हैं ! समझ में नहीं आता कि ये गाँधीवादी हैं या गाँधीबर्बादी हैं ! 

खैर जो भी हो मूल मुद्दा ये है कि अब तो आप भगवान से डाईरेक्ट बात कर सकते हो ! तो उनसे बोलकर इन गाँधीबर्बादीयों को जरा आप सन्मति दिलावाओ !  

अरे खुद तो आपका बर्थ डे ढंग से सेलीब्रेट करते नहीं और उपर से सारे देश में आज के दिन ड्राई डे घोषित कर हमें भी ढंग से सेलीब्रेट करने नहीं देते ! वो तो हम ओरिजनल पंजीकृत मोमबत्ती ब्रिग्रेडी बुध्दजीवी हैं इसलिए होशियारी से एक दिन पहले ही स्टॉक जमा कर लेते हैं और आपका हैप्पी बर्थ डे सेलीब्रेट करते हैं लेकिन आप तो जानते हैं हमारे देश की अस्सी प्रतिशत जनता गाँवो में रहती है और भोली भाली है इसलिए उनको बड़ी तकलीफ होती है ! कुछ बेचारे मजबूरी में ब्लेक में खरीदकर सेलीब्रेट करते हैं जो अच्छी बात नहीं हैं!

लेकिन इस वर्ष मुझे एक्स्क्यूज करेंगे क्योंकि जैसे ओमपुरी, अन्ना के अनशन के बीच में आ कर फँस गया था वैसे ही आपका बर्थडे अब के पित्र पक्ष के बीच में फँस गया इसलिए सेलीब्रेट नहीं कर पा रहा हूँ ! आशा ही नहीं बल्कि यकीन है कि आप मेरे दुख दर्द को समझ रहे होगें!  

आखीर में हमारे देश से वहाँ पधारे सभी गणमान्य महानुभावों को मेरा गुड आफ्टरनून कहना ! मुझे मालूम है वे लोग जो नर्क में होंगे वो तो वहाँ भी जुगाड़ कर ऐश कर रहे होंगे लेकिन जो आपके साथ स्वर्ग में होंगे उन्हे कहना हमारे लिए ज्यादा चिंता ना करें वैसे भी उन्होने अपना जीवन तो हमारे लिए बलिदान कर ही दिया है कम से कम अब वे चैन और सुख शांति से रहें !  

छोटे लाल बहादुर को मैंने अलग से एस एम एस कर हैप्पी बर्थ डे विश किया है शायद उन्हे मिल गया होगा ! अगर नेटवर्क जाम होने के कारण नहीं मिला हो तो उन्हे भी मेरी तरफ से हैप्पी बर्थडे विश कर देना !

वन्स अगेन हैप्पी बर्थडे टू यू व्हेरी मच एण्ड मेनी मेनी रिटर्न्स ऑफ द डे बट नॉट डिक्लियर्ड एस ए ड्राई डे ! चीयर्स .....

योर मोस्ट ब्लडी का फूल
काजू लाल चिरौंजीचीयर्स
आफिसर्स च्वाईस निवास
क्वाटर नं 1मेक्डावल रम
पोस्ट रायल स्टेग खम्बा
मुगल मोनार्च , एंटीक्यूटी 000420

बुधवार, 28 सितंबर 2011

इंडियन पाईरेट्स लीग और टीम इडली दोसा डेयर डेविल्स

IPL (इंडियन पाईरेट्स लीग) में टीम  आईथ्रीडीएट ID3  इडली दोसा डेयर डेविल्स के शुरूआती चार विकेट पतझड़ की तरह गिर गये ! राजाबाबू और कानीमाई तो सुप्रीम कोर्ट की पहले ही ओव्हर की यार्कर गेंदों पर क्लीन बोल्ड हो गये ! फिर कालीबाड़ी रैनाहेंडल दी बाल के लिए आऊट घोषित कर दिये और निधिपति द्रविड़ के रिटायर्डहर्ट होने के बाद टीम काफी दबाव में थी !

इसी बीच जनजूतार्दन टीम ने मौका देखकर मराठा स्टेट टीम के लेग स्पिनर अनशन वार्न को पार्टटाईम बालर के रूप में लगाया गया और चार ओव्हर मेडन डालकर उसने डेयरडेव्हिल्स टीम का रन रेट ही बिगाड़ दिया !

टीम इस सदमे से किसी तरह उबरती इसी बीच भरी दोपहरी में जनजूतार्दन टीम के मेनबालर पतंजली देव ने स्वयं ही गेंद अपने हाथ में लेकर अनुलोम विलोम स्विंग आक्रमण का हुँकार भरा ! पहले ही अपना रनरेट खो चुकी डेयरडेव्हिल टीम अब कोई रिस्क लेने की स्थिति मे नहीं थी ! अत: डूबती पारी को सम्हालने के लिए टीम के कुप्तान चुप्पी सिंह मौनी ने अपने रामभरोसे मंद बुल्लेबाज चिब्बू लिंगप्पा एवं पिंचू गांगुलीको दो रनर के साथ क्रीज सम्भालने भेजा !

शुरूआत में दोनो ने सम्भल कर खेला लेकिन रनरेट गिरता देख टीम की विदेशी कोच सोनी चैपल ने विडियो कांफ्रेसिंग के जरिये टीम मीटिंग में फैसला दिया कि एक छोर से आक्रमण किया जाय ! ऐसे में पिंचू गांगुली नें नान स्ट्राईक में रहकर अपना विकेट बचाना बेहतर समझा और चिब्बू लिंगप्पा को ये जिम्मेदारी सौंपी ! बस फिर क्या था चिब्बू लिंगप्पा ने पतंजली देव की मिडिल ओव्हर में ऐसी धुनाई की कि उनका पूरा स्पेल ही बिगड़ गया और वो वर्ल्ड कप में मनोज प्रभाकर की तरह स्पिन गेंदबाजी करने का मूड बनाने लगे !

इसी बीच जनजूतार्दन टीम के पार्टटाईम बालर अनशन वार्न चार ओव्हर मेडन डालकर खुद को मेन बालर के रूप में स्थापित करने के चक्कर में बैटिंग पावरप्ले के तुरंत बाद सोलहवें ओव्हर से गेंदबाजी करने की घोषणा कर दी ! अब डेयरडेविल्स टीम सदमें में आ गयी और टीम की विदेशी कोच सोनी चैपल को अचानक ब्लैकटेनिस एल्बो की चोट उभर आती है और वो डाक्टर आसांजे से सर्जरी करवाने अमेरिका के न्यूयार्क शहर स्थित व्हिस्की लीकेज हास्पिटल चली जाती है ! लेकिन जाते जाते मैच जीतने का जिम्मा एक सायकोलाजिस्ट डॉ अमूल और तीन फिजियो के जिम्मे छोड़ जाती है !

अनशन वार्न की पहली गेंद पर चिब्बू लिंगप्पा ने आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ते हुए गेंद स्टेडियम के बाहर भेजनी चाही लेकिन इस बार गेंद ज्यादा स्पिन हो गई जिससे वे चूक गये और स्टम्प आऊट होते होते बचे ! किसी तरह अम्पायर के साथ सेटिंग कर इसे वाईड बाल घोषित किया गया !

दो तीन गेंद के बाद अनशन वार्न की गेंद खतरनाक ढंग से टर्न लेना चालू किया तो दर्शकों का हूजूम भी स्टेडियम की तरफ दौड़ा और खचाखच भर गया ! मीडिया कामेंट्रेटर भी मौके की नजाकत देख अनशन वार्न को ब्रेडमेन के बाद सबसे महान खिलाड़ी बता अपनी TRP बढ़ाने लगे !

डेयरडेविल्स की टीम इस खतरनाक स्पिन को झेल नहीं पायी और उसने बालिंग एक्शन पर आपत्ति कर दी ! नियम बनाने वाली संस्था ICC इंडियन कांस्टीट्यूशन क्लब ने इस पर अपनी राय देने के लिए समय माँगा ! इसी बीच भैय्यूजी शास्त्री जिनका दोनो टीमों के खिलाड़ियों से पुराना सम्बंध है, को मध्यस्थ बनाकर अंदरूनी समझौता किया गया और खराब रोशनी की अपील कर मैच रूकवा दिया गया !

दर्शकों को एक्सपर्ट कमेंट्री टीम ने बताया कि डकवर्थ लुईस नियम से मैच ड्रा घोषित कर अनशन वार्न को मैन ऑफ द मैच दिया जाता है! यह मैच भले ही ड्रा हो गया किंतु  अनशन वार्न को दूसरा ब्रेडमेन घोषित कर दिया गया ! अब सारे खेलप्रेमी एक ही गाना गाते  हैं मैं भी अनशन, तू भी अनशन , अब तो सारा देश है अनशन “ !

चूँकि ये इंटरटेन्मेन्ट चैम्पियंस लीग है अत: मैच फिर चालू हुआ ! अब चिब्बू लिंगप्पा अपने ही साथी बल्लेबाज पिंचू गांगुलीके काल पर रन लेने दौड़े लेकिन रन आउट हो गये ! चिब्बू लिंगप्पा ने स्वयं को आऊट घोषित करने की क्षद्म पेशकश की लेकिन टीम की विदेशी कोच सोनी चैपल ने कुप्तान चुप्पी सिंह मौनी को रेफरल सिस्टम के अपील का उपयोग करने का निर्देश दिया! इसी निर्देश का पालन कर डिसीजन थर्ड वेम्पायर के पास भेजा गया है लेकिन कुप्तान चुप्पी सिंह मौनीको मालूम है कि चिब्बू लिंगप्पा क्लीयर आऊट हैं इसलिए शायद बार बार नोबाल नोबाल चिल्ला रहे हैं !

अब सारी कवायद इसी बात पर चल रही है कि किसी तरह DRS का लाभ उठाकर किसी एंगल से कोई रास्ता मिल जाये तो बेनिफिट ऑफ डाऊट बेट्समेन के फेवर में दिया सके क्योंकि ये तय है कि चिब्बू लिंगप्पा के आऊट होते ही कुप्तान चुप्पी सिंह मौनी को क्रीज पर बैटिंग करने आना पड़ेगा और फिर बात आगे निकल कर पुछल्ले बल्लेबाज राबर्ट नेहरा को भी बैटिंग़ करनी पड़ सकती है ! जिसे विदेशीकोच सोनी चैपलने विशेष प्रतिभावान खिलाड़ी बताकर टीम में जगह दिलाई है !  

मैच अभी रूका हुआ है जैसे ही बालिंग बैटिंग चालू होगी आपको आँखों देखा हाल बताने के लिए पुन: हाजिर रहुँगा !

पीते रहें तब तक और देखते रहें एक टक ! चीयर्स जय हो...

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

मेरा जीवन दर्शन

जीवन के बहुमूल्य 20 वर्ष पोथी पढ़ने में व्यतीत किया ! (A+B)2  की सार्थकता उदरपूर्ति के अलावा नजर नहीं आयी किंतु न्यूटन का तीसरा नियम इन परेशानियों में समान वेग से विपरीत प्रतिक्रिया करने लगा फलस्वरूप फिर जोखिम उठा बुध्दजीवियों एवं दार्शनिकों को 10 वर्षों तक अध्ययन करने का प्रयास किया किंतु किसी ने भी महल और झोपड़ी के असमानता के कारण से मुझे संतुष्ट न कर सका ! सोचा चलो स्वयं ही अपने जीवन दर्शन की खोज में निकल पड़ता हूँ शायद मंजिल मिल जाये और जीवन सार्थक हो जाये !

इसी उधेड़बुन में अकेला ही बिना किसी पूर्वाग्रह और प्राप्ति की आकांक्षा से निकल पड़ा ! रास्ते पर कई मुसाफिर मिले उनमें कुछ फकीर से जीवन की मूलभूत समस्याओं का बोझ लेकर किंतु असीम आत्मिक सुख से परिपूर्ण
,चेहरे पर बेफिक्री का आलम और अलौकिक तेज से परिपूर्ण, जीवन को उत्सव की तरह मनाते हुए भविष्य की परवाह न करते हुए वर्तमान में जीते लोग जिन्हे यांत्रिक दुनिया दलित और पिछड़ा मानते हुए आदिवासी की संज्ञा देती है !

कितनी सटीक संज्ञा है “ आदिवासी “ ! आदिकाल से यही लोग हैं जो जीवन जीने की वास्तविक कला जानते हैं ! किंतु यांत्रिक दुनिया के रहनुमा इन्हे अपने निजी यंत्रों को सुचारू रूप से चलायमान स्थिति में रखने के लिए अब संसाधन की तरह उपयोग करने लगे हैं और उनका वो जीवन उत्सव अब मातम में परिवर्तित हो चुका है !

इन्ही उलझनों के साथ उफाफोह की स्थिति में किसी तरह यात्रा की निरंतरता बना चलता रहा !अचानक
जीवन पथ पर अनचाहे रूप से एक ज्ञानी दीमक से सामना हुआ ! इठलाकर कहने लगा तुम्हारी चाल शास्त्र सम्मत नहीं हैं ! विद्वानो ने तुम्हारे चाल चलने के तरीके को गलत बताया है ! सही तरीका ये है जो मैं चल रहा हूँ ! मैंने उससे पूछा महोदय आप जो कह रहे हैं मैं उसका विरोध नहीं कह रहा हूँ पर आप सही कह रहे हैं इसका आप कैसे दावा कर सकते हैं ! उसने बड़े दम्भपूर्वक कहा थोड़ा परिश्रम करो और फलाँ-फलाँ पोथी पढ़ो !

एक क्षण रूका और सोचा तो ध्यान आया कि ये सारी पोथी
,ये ग्रंथ तो मैंने स्वयं से खिन्न होकर एक आलमारी में बंद कर कई वर्षो से रख छोड़ी हैं ! मन में निश्चय किया कि क्यों न एक बार पुन: देखा जाय दीमक महोदय ने जब इतने आत्मविश्वास से कहा है तो कहीं मुझसे ही कोई गलती नहीं हुई? बरसों बाद उस आलमारी को खोला तो देखा सारी पोथियों को दीमक चाट चुके हैं ! एक वरिष्ठ प्रशासनिक दीमक ने कहा हमारा स्वयंसेवी मानवाधिकारी मार्गदर्शक दीमक आपकी सारी पोथी चाट गया है और कह गया है कि हमारे चाटने के लिए भी कुछ पोथी की व्यवस्था करेगा !

मैंने उनसे कहा आप मेरे अतिथि हैं आपको भूखा रखना मेरे लिए पाप होगा अत: मेरे इस पोथी ज्ञान अर्जन के प्रमाण पत्र जो कुछ ईंटगारों से बने प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदान किये गये हैं तथा जिन्हे मैं अपने जीवन के स्वर्णिम दिनों में अर्जित किया था और इन्हे अमूल्य निधि समझ कर सहेज कर रखा था
,यही शेष है जो अब मेरे किसी उपयोग का नहीं है ! इसे ही भक्षण कर अपनी पिपासा शांत करें !

अतिथियों से विदा लेकर वापस उसी ज्ञानी दीमक के पास लौटा और बड़े विनय पूर्वक कहा महोदय आपने मेरी पूरी पोथी तो चाट ली है एक उपकार और कर दें
, इस मूढ़मति में जो कुछ पोथी ज्ञान बचा हुआ है उसे भी चाट कर खाली कर दे ताकि मैं स्वयं की खोज में बिना किसी पोथी ज्ञान के निकल सकूँ तथा फिर से कोई और ज्ञानी दीमक मुझे भटका ना सके !

बस अब चल पड़ा हूँ सारी पोथी तजकर और अपनी मूढ़मति से सारा पोथी ज्ञान हटाकर कबीर और रैदास के पद चिन्हों पर ! आमंत्रित करता हूँ सभी पथिको को जो मेरी तरह इन सभी को त्यागकर निकल पड़े हैं वास्तविक आनंद की तलाश में बिना किसी महत्वाकांक्षा के ! आईये साथ चले उस मार्ग पर जहाँ जीवन का हर पल अभावों के बावजूद भी उत्सव हैं !! जय हो !! ...

रविवार, 18 सितंबर 2011

मोदी और मीडिया पर अनशन

मोदी के उपवास पर इतनी हाय तौबा क्यूँ ! क्या मोदी ने मीडिया को आमत्रंण भेजा था ! उपवास कर रहा है करने दो ! देश में वैसे भी रोज लाखों लोग भूखे रहते हैं किसे फर्क पड़ता है ! जो लोग इसके पक्ष में हैं वो इसमें अपनी जमीन तलाश रहे हैं और जो विरोध कर रहे हैं उन्हे अपनी जमीन खिसकती दिखाई दे रही है ! आम आदमी को इससे क्या मतलब ! कुछ सरकारी सेक्यूलर लोग टीवी पर लगातार एक ही बात की रट लगा रहे हैं मोदी मे माथे क...ा कलंक नही मिट सकता और जनता उसे कभी माफ नही करेगी ! अरे नही मिट सकता तो न मिटे अपनी बला से और रही बात जनता की तो अगले वर्ष 2012 के विधान सभा नतीजे बतायेंगे कि जनता ने उन्हे माफ किया या नहीं ! बस मेहरबानी कर मोदी को उसके हाल पर छोड़े और अपनी उर्जा महँगाई और आतंकवादी घटनाओं को रोकने में लगायें तो शायद आपके माथे का कलंक मिटे और देश की जनता आपको 2014 में माफ कर दे ! रही बात मीडिया की वो तो अब भाँड हो चुकी है वहीं नाचेगी जहाँ उसे TRP रूपी बख्शीस मिलेगी ! जय हो ...

सोमवार, 12 सितंबर 2011

गाँधी , गाँधीवाद , अहिंसा और अन्ना


कुछ दिनों पहले अन्ना द्वारा कसाब को सरेआम फाँसी दिये जाने के बयान पर गाँधीवादियों ने काफी कोहराम मचाया , अन्ना स्वयं को गाँधीवादी मानते हैं और गाँधीवाद के विरूध्द आचरण करते हैं !

दरअसल गाँधीवाद क्या है ? यह एक क्षद्म आवरण है आज के रहनुमाओं का ! मैंने कभी नहीं सुना गाँधी ने भी कभी गाँधीवाद का पालन किया हो ! अगर ऐसा था तो उन्होने उमर अब्दुल्ला के अफजल गुरू मामले की तरह भगत सिंह की फाँसी का विरोध क्यों नही किया ? गाँधी ने जिस राम को अपना जीवन आदर्श माना उन्ही राजाराम ने रावण, बाली सहित कई वध किये !

रही बात अहिंक होने की तो अहिंसा का अर्थ काफी व्यापक होता है जो कम से कम गाँधी के अहिंसा की परिभाषा से पूर्ण नहीं होता ! अन्ना के आंदोलन एवं आमरण अनशन को अहिंसक आंदोलन कहा जा रहा है लेकिन कितनों के ये पता है कि इस अनशन में अरूण नाम के एक अनशनकर्ता की मृत्यु हो गई तो फिर ये अनशन अहिंसक कैसे हो गया !

बुध्दजीवियों से अपेक्षा है कि जरा सोचें मनुष्य अगर अपनी हत्या स्वयं करने को तत्पर हो तो उससे बड़ा हिंसक और कौन हो सकता है ! आमरण अनशन का क्या अर्थ है , किसी बात पर कोई ये कहे कि अगर उसकी बात नहीं मानी जाती तो वह आमरण अनशन करेगा मतलब आप उसकी बात नहीं मानों तो वो खुद को भूखा रखकर अपनी हत्या स्वयं कर देगा !

अत: मेरे विचार से आमरण अनशन को कभी भी अहिंसक आंदोलन नहीं कहा जा सकता ! लेकिन अहिंसा का अर्थ ये नहीं की आप पर कोई हमला करे तो आप ये कहें आप मुझे मार सकते हैं किंतु मैं अहिंसा का पुजारी हूँ आपको मैं बिरियानी खिलाने के अलावा कोई कार्य नहीं कर सकता ! मजे की बात तो ये है कि जिसे गाँधी टोपी कहकर लोग पहनकर अपने आप को गाँधीवादी कहते हैं उस टोपी को गाँधी ने कभी पहना ही नहीं !

किस गाँधीवाद की बात कहते हैं जिन दलित अछूतों को उन्होने ईश्वर का अंश मानकर “हरिजन” नाम दिया वही शब्द आज उत्पीड़न कहलाता है ! किसी आतंकवादी की फाँसी की सजा को माफ कर हम क्या साबित करना चाहतें हैं ! इससे दो ही स्थिति बनेगी या तो उस व्यक्ति को ताउम्र कैद में रखकर उसे पल पल मौत का एहसास कराया जाय या फिर से कंधार विमान अपहरण जैसे किसी घटना के लिए राह से भटके हुए भाईयों को उत्प्रेरित किया जाय !

दोनों ही स्थिति में जो घटनायें होगीं क्या उसे अहिंसक कहा जा सकता है ! यदि इंडियन मुजाहद्दिन के ईमेल पर यकीन करें तो उन्होने अफजल गुरू के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में धमाके किये हैं ! ऐसी स्थिति में अफजल के लिए सजा-ए-मौत की माफी का आंदोलन अहिंसक है ??????

दरअसल हमारी समस्या ये है कि हम उस व्यक्ति की बातों पर अंधश्रध्दा रखते हैं जो तथाकथित रूप से सफल है चाहे वो गलत ही क्यों न हो और यदि कोई उसकी गलत बातों पर आक्षेप करता है तो हम कहते हैं कुछ भी कहने के पहले उस महान व्यक्ति के बराबर कोई कार्य करो जैसा मेरे एक विद्वान मित्र अक्सर कहते रहते हैं !

अन्ना का कसाब पर दिया गया बयान उनके क्षद्म गाँधीवादी आवरण को फाड़कर एक आम हिंदुस्तानी के मन की पीड़ा है जो कमोवेश अंजाने में ही सही लेकिन बाहर आ गई ! उनके पहले के भी बयानों को ध्यान दें जिन्हे तथाकथित बुध्दजीवियों द्वारा अनर्गल कहा जाता है , मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है कि अन्ना के ह्रदय में एक आम भारतीय आदमी का दिल है जो ज्यादा देर तक किसी क्षद्म आवरण में रह नहीं पाता और रह रह कर उनके बयानों के रूप में गाँधीवादी आवरण से अपनी गर्दन बाहर निकालता रहता है !