शनिवार, 2 जून 2012

सच का सामना

दोस्तों, देश के सबसे मशहूर शो “सच का सामना” में आज आपकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से करायेंगे जो पैसों के लिए नहीं केवल शोहरत बटोरने आईं है । पेशे से जल बचाओ आंदोलन के अंतराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध मोमबत्ती ब्रिग्रेडी अग्निप्रज्वलकर्ता आदरणीया “ मेरिण्डा फटीचादर” आज सच का सामना के तीखे प्रश्नो का जवाब देंगी और इनकी इज्जत बच गई तो इसकी फुटेज अमेरिका भेजकर चंदा बटोरेंगी । अगर आपका दिल करता है तो स्वागत करें बाबा मेरिण्डा ताई जी का ..  नहीं  करता तो ना करें । ताई ने पहले से ही स्वागत के लिए अपने चमचों को बुला रखा है । 

तो मेरिण्डा ताई जी आपने अपना पूरा जीवन जल बचाओ आंदोलन में लगा दिया है । आपके सुनहरे बाल बिखरे हुए जरूर हैं लेकिन शरीर बिल्कुल स्वच्छ है और भीनी भीनी खूशबू भी आ रही है ।

महाराज का पहला सवाल आपसे है => क्या आपने कभी नग्न अवस्था में स्नान किया है ?

मेरिण्डा =>  नहीं 

आईये देखते हैं पालीग्रफिक मशीन क्या कहती है .. 

कम्प्यूटर =>   ये जवाब ...........................  बिल्कुल सही है

आप ये कैसे कर लेतीं हैं ... मतलब पूरे कपड़े पहन कर कैसे नहा लेतीं हैं ??

मेरिण्डा ताई =>  चिंतन से ! किताबों से नहाने की विधि पढ़कर मन में ये भाव उत्पन्न कर लेतीं हूँ कि अथाह जल में डुबकी लगा रही हूँ ।  इस तरह से स्नान की अनुभुति हो जाती है और जल का दुरूपयोग भी नहीं होता । मैं जल के दुरूपयोग की सख्त मुखालफत करती हूँ ।

महाराज => मतलब क्या आप शौच हेतु भी जल का प्रयोग नहीं करती ?

मेरिण्डा ताई => नहीं मैंने आपको कहा ना जल का  किसी भी रूप में अपव्यय समाज और पर्यावरण के लिए हानिकारक है । हमारे आंदोलन से जुड़े कुछ विदेशी भाई बहन भी हैं जो हमें इस कार्य हेतु  विशेष प्रकार के कागज भेजते हैं ।

महाराज => फिर तो आप गर्मी में कूलर का भी उपयोग नहीं करती होंगी ?

मिरिण्डा ताई => बिल्कुल नहीं ऐसा कोई भी कार्य जो जिसमें जल का उपयोग होता है उसका हम विरोध करतें  हैं । नैसर्गिक जल पर समाज के निचले तबके का अधिकार होना चाहिए अत: इसका उपयोग किसी भी स्थिति में उच्च वर्ग के लोगों के लिए प्रतिबंधित होना चाहिए । इसिलिए हम पीने का पानी भी बोतल वाला पीते हैं , हैण्डपंप या कुँये का नहीं ।

महाराज =>  तो आप अपने पसीने और मैल की बदबू से कैसे निजात पाते हैं ?  

मिरिण्डा ताई => हम हमेशा वातानूकूलित कक्ष में रहते हैं सो पसीने का सवाल ही नहीं ।  हाँ गरीबों पर चिंतन करते करते कभी कभी आन्दोलन आदि के लिए झोपड़पट्टी की तरफ फोटो खिचाने जाते हैं तो वापसी पर स्टीमबाथ लेकर परफ्यूम स्प्रे करते हैं लेकिन जल का उपयोग नहीं करते क्योंकि जल संरक्षण हमारे जीवन का मुख्य लक्ष्य है ।

महाराज =>  आप कपड़े धोने के लिए तो पानी का इस्तेमाल करती ही होंगी ?

मिरिण्डा ताई => नहीं इसका तो सवाल ही नहीं उठता, हमारे सारे कपड़े ड्राईक्लीन होते हैं।

इससे पहले की महाराज मिरिण्डा ताई से और सच उगलवाते उनके बोतल में मिलाये गये अफीम का नशा उतर गया और तमरमाती हुई बोलीं सुनो महाराज अगर धोखे से भी इस एपिसोड का प्रसारण हुआ तो सारे बाँध बचाओ आंदोलन की दिशा तुम्हारी तरफ मोड़ दूँगी । तुम्हारे इस एक एपिसोड से मेरे जीवनभर की  मेहनत खराब हो जायेगी । हाँ अगर कुछ चंदा पानी या एवार्ड की  चाहत है तो बताओ उसका जुगाड़  करवा दूँगी लेकिन ये एपिसोड किसी भी स्थिति में टेलिकॉस्ट नहीं होना चाहिए ।

हमने कहा सुनो ताई ये धमकी और लालच किसी और को देना । नंगा नहायेगा क्या और निचोड़ेगा क्या ? हमारे पास है ही क्या जो तुम बिगाड़ लोगी ? रही बात तुम्हारे चरित्र की तो अब धीरे धीरे सारी दुनिया में तुम्हारे जैसे जयचंदों की तस्वीर साफ होते जा रही है लेकिन अफसोस तो ये है कि तुम्हारी प्रजाति भी बेशरम के पौधे की तरह है एक के जड़ जमने की देर है पूरी बस्ती ही बसा लेते हो ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. संजयजी, गहन चिंतन कीजिये...........हमे ऐसी ही ताई या ताइयों की आवश्यकता है.......जो पानी के संरक्षण के लिए इतना गहन चिंतन करती हैं .....वाटर कूलर नहीं AC .........नहाना नहीं ..टोइलेट के लिए पानी नहीं बल्कि बिलायत से आयातित कागज़ .और बदबू के लिए फ्रांस से आयातित स्प्रे .......और पिने के लिए मिनरल वाटर ...वो हम गरीबों के बारे मैं कितना सोचती हैं.............ऐसी यदि बहुत ताइयों की जमात हो जाए तो हमारे देश का कल्याण हो जाये.........प्रणाम मिरिंडा ताई को सलाम पेप्सी आंटी को सत सत नमन है thums up खालाजी को .....जय जय.............

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  2. उत्तर
    1. धन्यवाद आपका शिवम मिश्रा जी :)

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