शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

कौआ चौथ व्रत

कौआ चौथ मोमबत्ती ब्रिग्रेडियों का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के सभी प्रांतो का पर्व  है। यह किसी भी समय चतुष्पद पँछधारी द्वारपाल के समान भोकने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व सेक्यूलर मानवधिक्कारी कार्यकर्ता मनाते हैं। यह व्रत किसी भी समय से सार्वजनिक स्थानों में शुरू होकर मीडिया दर्शन के बाद संपूर्ण होता है। 

ग्रामीण अनशनकारी से लेकर आधुनिक पंजीकृत बुध्दजीवियों तक सभी मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी कौआ चौथ का व्रत बडी़ निष्ठा एवं उत्साह के साथ रखते हैं। डालरशास्त्र के अनुसार यह व्रत किसी जुगाडू और शातिर ब्रिग्रेडी के फँसने पर , सत्ताधीशों को ब्लेकमेल करने के लिए अथवा अखण्ड भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ही करना चाहिए। विदेशी चंदे एवं अमरीकी डॉलर सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किसी भी शुभ दिन डॉलर देवता जी की अर्चना की जाती है। कौआ चौथ में भी बकरचंद श्वान की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में मोमबत्ती जलाकर मीडिया द्वारा टीवी में दिखाये जाने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में कौआ चौथ व्रतोत्सव ज्यादातर मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी अपने स्वयंसेवी संगठनों में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाते हैं लेकिन अधिकतर मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी निराहार रहकर डॉलर आगमन की प्रतीक्षा करते हैं।
व्रत
मेट्रोपोलिटिन शहर में जहाँ मिडिया कव्हरेज उपलब्ध हो कुकुर चौधरी (कौआ-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सेक्यूलर हरी लुँगी मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी को ही यह व्रत करने का अधिकार है। व्यक्ति किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय का हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है केवल गेरूये रंग के धोतीधारक के  लिए ये व्रत प्रतिबंधित है । जो मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी विदेशी चंदे से आमदनी व डॉलर की कामना करते हैं वे यह व्रत रखते हैं। 

यह व्रत मौका देखकर लगातार भी किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का जूस पीकर उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी आजीवन रखना चाहें वे सुविधानुसार धमकी देकर ब्रेक ले ले कर जीवनभर इस व्रत को कर सकते हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सभी मानवधिक्कारी मोमबत्ती ब्रिग्रेडी डॉलर अनुदान रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।

व्रत की विधि
किसी भी स्याह पक्ष की कुकुर तिथि अर्थात उस तिथि की रात्रि को जिसमें मीडिया में फूल कव्हरेज मिलने की सम्भावना सेठ हो , उस दिन प्रातः आठ दस साम्प्रदायिकता के खिलाफ धिक्कार भरे नारे याद कर अपने विदेशी डॉलर प्रदाताओं के निर्देशन में जनेऊ धोती और चुटिया को गाली गलौज करने का संकल्प लेकर दिनभर चिल्लाते रहें। 

पूजन
कौआ चौथ के एक दिन पूर्व शहनाज हुसैन के ब्यूटी पार्लर से मेकअप करवा लें फिर सुबह भरपेट पौष्टिक नाश्ता कर किसी मँहगे फैशन डिजायनर द्वारा निर्मित सफेद अर्धपारदर्शी महीन कपड़े के बाजूमुक्त बड़े गले के घेरे वाला कुर्ता एवं छिद्र युक्त लो वेस्ट जींस पहन एवं डिजायनर झोला लटकाकर चौक चौराहों पर अपनी बौध्दिक एवं शारीरिक सुंदरता का प्रदर्शन कर अंग्रेजी भाषा में लफ्फाजेदार भारी भरकम शब्दों से वाणी विस्फोटित करे और मन ही मन डॉलर देवता का स्मरण करें। पूजन करने के लिए मोमबत्ती जलाकर किसी व्यस्त चौराहे या ऐतिहासिक इमारत जिसके सामने तस्वीर अच्छी खिंचती हो एक गोल घेरा बनाकर ज्यादा से ज्यादा जलती हुई मोमबत्तियों को स्थापित करें। 

नैवेद्य
कामेडी टीवी सिरीयल्स के लिए संवाद लिखने वाले दादा कोंडके टाइप के लेखकों से कुछ शुद्ध तुकबंदी वाले नारों को रचना पूर्व से करवा लें ! हाय हाय, मुर्दाबाद, अन्याय नहीं सहेंगे, अभी तो ये अंगड़ाई है  आगे और लड़ाई (कमाई) है टाईप के नारों की सुविचार वर्णित पट्टिका और बेनर बनवा लें ! वैसे सुविधानुसार किसी मानवधिक्कारी प्रिंटिंग प्रेस में ऐसे नारों की सुविचार वर्णित पट्टिका की फ्लेक्सी रेडीमेड भी मिलती है वो भी खरीद सकते है !   

कौरवा
काली मिट्टी से सने कुछ दबे कुचले मजदूर और रिक्शा चलाने वाले कुछ साधारण भीड से दिखने वाले लोगों को मानदेय देकर इकठ्ठा करें ! यदि ऐसा करने में आप समर्थ ना हो तो आप इन्हे किराये से भी ले सकते है ! इस हेतु देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थान तीस्ता मोर्चा सप्लाई ऐजेंसी, मल्लिका बिकनी मोर्चा, नरमेधा धरना एसोसिएट्स आदि से सम्पर्क कर उचित दर पर अनुभवी कौरवा प्राप्त की जा सकती है !  

संख्‍या
ज्यादा से ज्यादा कौरवे अपनी सामर्थ्य अनुसार रखें। 

पूजन विधि
सभी कौरवों को सुविचार वर्णित पट्टिका प्रदान कर उन्हे अपने पार्श्व भाग पर कतार बध्द कर इस प्रकार धारण करायें कि सुविचार पट्टिका सर्वसाधारण को स्पष्ट रूप से दिखाई दे ! स्वयं को इस प्रकार स्थापित करें की आपका सौंदर्य प्रसाधनो से युक्त दीप्तमान मुखमण्डल और डिजायनर वस्त्र पूर्ण रूप से चौथे खम्बे (मीडिया) के निगाह क्षेत्र में रहे । 3 जी मोबाईल के द्वारा विदेशी दानदाताओं से नाड़ा बाँधकर डॉलर देवता की भावना करके निरंतर सम्पर्क स्थापित करें। पूरे पूजन के दौरान अविराम यथाशक्ति साहित्यिक शब्दों में गालीयों का प्रक्षेपण कर कौवा चौथ व्रत की कथा पढ़ें अथवा सुनें। 

सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर विदेशी अग्नि प्रज्वलन यंत्र द्वारा मोमबत्ती में अग्नि स्थापना करें और कुछ दूर पद परिचालन कर व्यस्त चौराहे या ऐतिहासिक इमारत के समक्ष उसे स्थापित कर अर्घ्य प्रदान करें। इसके पश्चात सभी छवि प्रक्षेपण अधिकारियों को सपरिवार सर्वसुविधा युक्त आश्रम में उर्जाजल सहित उत्तम भोजन कराएँ। भोजन के पश्चात उन्हे यथाशक्ति द्रव्य दक्षिणा देकर कृतज्ञता प्रकट करें । 

मोहनी माता (अर्थात राजमाता ) को सारी पूजन के दौरान बंधन मुक्त रखें और अपनी मातृभक्ति हेतु अर्पित एक लोटा, वस्त्र किसी स्वामी भग्निदोष जैसे विशेष कौरव के माध्यम से भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे विदेश प्रवास में हों तो उनके तुल्य बबलू या माता द्वारा नियुक्त किसी भाट चारण मण्डली को भेंट करें। इसके पश्चात स्वयं या परिवार के किसी अन्य योग्य वक्ता सदस्य पहले किसी चौथे खम्बे के वातानूकूलित छायागृह (मीडिया स्टूडियो) में जाकर व्रत की महिमा का बखान करें तत्पश्चात किसी सिक्स स्टार बार में जाकर देर रात्रि तक उर्जा जल ग्रहण कर व्रत तोड़े !  

इस तरह से कौवा चौथ व्रत करने पर सभी उल्लूओं से डॉलर देवता प्रसन्न होंगे एवं व्रत सफल होकर धन धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होगी ! 
बोलो मोमबत्ती प्रिय डॉलर देवता की जय !

8 टिप्‍पणियां:

  1. बंधुवर....यह हुई कुछ बात....आपने कौवा चौथ की जगह जागरण का मुर्गा चौथ रच डाला है .....जरा ध्यान से उसे बांचिए....वाह...वाह....वाह..

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  2. हा हा हा वाह संजय बाबू क्या खूब पूजा विधी बताई आपने

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  3. हा हा हा ....इस विधि को महेश भाट, और संदीप को भी बताया जाए ....

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  4. बहुत खूब।
    रोचक प्रस्‍तुति।

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  5. आपकी उडान पढ़ कर ये लगा कि जैसे "कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्षस्थ्ले कौस्तुभं....." श्लोक का अर्थ यू निकाला गया हो:-
    मैया कस्तूरबा बाल गंगाधर तिलक जी से कह रही है की हे तिलक !, एक (मजबूत ) पाटा लेकर (अंग्रेजों को ), मार मार कर उनके सीने में छिपे कलुषित ह्रदय , जिसको वे लोग कौस्तुभ मणि अर्थात अच्छा समझते है निकाल कर बाहर फेंक दो ....
    व्यंग का एक ये भी प्रकार है.

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