शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

कृष्ण ईवटीजर ही नहीं शातिर चोर भी




कभी कभी जब कुछ काम नहीं होता तो फालतू लोगों के बयान दिमाग में आने लगते है । शायद इसी लिए कहा गया है "खाली दिमाग शैतान का" । ऐसा ही वाक्या अभी अभी मेरे दिमाग के साथ हुआ चूँकि अब दिमाग शैतान का था इसलिए सीधे जयपुर पहुँचा और प्रसून जोशी से टकराया । 

विगत दो वर्षों से पुष्कर में लगने वाला गदर्भ मेला अब जयपुर में लगने लगा है । इसी मेले में नन्दी ने अपने बयान से खूब सुर्खियाँ बटोरी । सुर्खियाँ इसलिए क्योंकि आजकल विवादास्पद होकर ही सुर्खियाँ बटोरी जा सकतीं है वरना चौथे स्तम्भ को बड़ी जिम्मेदारी उठाने एवं सत्ता का जहर पीकर माँ के कंधो पर रोने वालों के अलावा कोई सुर्खियाँ कहाँ दिखती है । 

सुर्खियाँ बटोरने की दौड़ में प्रथम स्थान हेतु प्रयासरत प्रसून जोशी को काफी मायूसी हुई होगी क्योंकि उनके बयान से किसी की धार्मिक भावनायें आहत नहीं हुई और वे नन्दी से पिछड़ गये । प्रसून ने यहाँ पर बहुत बड़ी तकनीकि भूल कर दी । या तो उन्हे किसी ऐसे समुदाय के इष्ट पर टिप्पणी करनी थी जिनकी भावनायें आहत हो जाती हैं या फिर भरी दोपहरी सपने देखने वाले प्रवीण तोगड़िया से पहले ही मैच फिक्स कर लेना था । 

जबसे पता चला है कि कृष्ण गुजरात के द्वारिका में शिफ्ट हो गये थे, वो लालू और मुलायम जैसे सेकुलर यादवों के इष्ट भी कहाँ रह गये हैं जिससे उनकी भावनायें आहत हो ।

खैर प्रसून बाबू मैं आपके महाज्ञान को जरा दुरूस्त करना चाहता हूँ । कृष्ण केवल ईव टीजर ही नहीं थे वे शातिर चोर भी थे । गोकुल में ऐसा कोई घर नहीं होगा जिसमें उन्होने माखन चोरी नहीं की होगी । 

लेकिन यदि कृष्ण के बारे में कुछ गंभीर कहना है तो पहले उन्हे आत्मसात कीजीये । किसी गदर्भ सम्मेलन में चिंता कर कृष्ण को नहीं समझा जा सकता । उसके लिए मीरा और सूर जैसी लगन चाहिए । 

प्रसून बाबू आप गीतकार अच्छे हैं कभी कभी दूसरों के गीत भी पढ़ लिया कीजीए । कभी जानने का प्रयास किया है जब उद्धव गोपी प्रसंग ? देखिए कैसे गोपिकायें कृष्ण के विरह में तड़प रहीं हैं । क्या आपकी नजर में ऐसी कोई स्त्री है जो अपने मुहल्ले में किसी ईवटीजर को ना पाकर ऐसी विरह वेदना से भर जाती है । अपनी बहन और बेटी से ही पूछकर देखें कि जिस दिन उन्हे कोई ईवटीजिंग नहीं करता है तो क्या वे दुखी होकर खाना-पीना छोड़ देती हैं ? 

एक बार महसूस कर देखें कि कृष्ण की लीला और ईव टीजिंग में कितना बुनियादी फर्क है फिर आप अपनी माँ से यही कहेंगे “मैं तुझे बतलाता नहीं, कितना घटिया सोच सकता हूँ मैं माँ “ और आपके तारे दिन में ही जमीन पर आ जायेंगे । 

खैर बात निकली है तो ये भी कहना चाहूँगा कि कृष्ण पर कोई कितना भी कीचड़ उछाले कम से कम मेरी भावनायें आहत नहीं होती और ना ही गुस्सा आता है क्योंकि मेरा कृष्ण इतना कमजोर नहीं जो किसी के कीचड़ उछालने से मैला हो जायेगा । मुझे अगर कुछ आता है तो सिर्फ प्रसून जैसे लोगों की बुद्धि पर तरस । 

जो भी मित्र प्रसून जोशी के बयान से सहमत हो उनके चिंतन के लिए सूरदास के उद्धव-गोपी संवाद के कुछ अंश ....


ऊधौ हम आजु भईं बड़ भागी ।
जिन अँखियन तुम स्याम बिलोकेए ते अँखियाँ हम लागीं ॥
जैसे सुमन बास लै आवतए पवन मधुप अनुरागी ।
अति आनंद होत है तैसेंए अंग.अंग सुख रागी ॥
ज्यौं दरपन मैं दरस देखियतए दृष्टि परम रुचि लागी ।
तैसैं सूर मिले हरि हम कौंए बिरह बिथा तन त्यागी ॥




6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  2. कृष्ण के बारे में अपना भी मत कुछ ऐसा ही है.अच्छा लिखा है

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  3. ्कृष्ण को समझने के लिये कृष्ण होना जरूरी है और ये बात कम से कम आम मानव तो नहीं समझ सकता जिसने सिर्फ़ भौतिकता का चश्मा पहन रखा हो …………बिल्कुल सटीक आकलन किया है आपने

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