शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

सरकार तो बननी तय है


चेला भोला शंकर भी आजकल राजनैतिक पण्डिताई की दुकान जमाने में लगा है । कल सुबह सुबह ही उसने मुझसे निवेदन किया - महाराज , आपके मातापिता को नमन है जिन्हे आपके जन्म पर ही पता चल गया कि आप दूरदृष्टा होंगे इसलिए आपका नाम संजय रख दिया । आप जैसा अंतर्यामी इस ब्रह्माण्ड में कोई नहीं । एक बार अगर शोभन सरकार के सपने के बारे में पुरातत्व वाले आपसे सलाह लिये होते तो आज साठ लाख रूपये की ऐसी मिट्टी ना खोदे होते जो ईंटा भट्टा के काम भी नहीं आ पा रहा है । 

हमने कहा - रे, ब्रह्मभट्ट कुल के नन्दन । हमारे खुरदरे चरित्र पर चिकनाई लगाना छोड़  ।  मेरे मातापिता भी हर  बालक के मातापिता जैसे ही सामान्य थे , जो समयकाल के लोकप्रिय व्यक्ति के नाम पर बच्चों का नाम रखते हैं । घरवाले बताते हैं कि पिताजी ने जब हमें पहली बार गोद में लिया था तब हमने उनके उपर तेज धारा में ऐसा मूत्र प्रक्षालन माने सू-सू कर दिया जैसे उनकी जटा से कोई नदी उद्गम हो रही हो इसी चरित्र के कारण उन्होने संजय गाँधी के नाम पर हमारा नामकरण कर दिया । हालांकि घर वालों की बात पर मैं अब भी विश्वास नहीं करता हूँ ।

 विश्वास से याद आया .... बता बे कुमार विश्वास के चारित्रिक सहोदर  इस चापलूसी के पीछे तेरा क्या स्वार्थ निहित है ? 


भोला सकपकाया और संकोच करता हुआ बोला - महाराज , हमारी दोनों पार्टी के लाईजिनिंग नेतानुमा व्यापारियों से सेटिंग हुई है । उन्होने कहा है कि एक बार उन्हे गोपनीय ढंग से बता दें कि कंफर्म किसकी सरकार बन रही है तो अपना दक्षिणा पेंशन सेट कर देंगे ।

हमने कहा - ठीक है , दोनों को एक एक कर भीतर खोपचे में लाओ । 

चेला भोला दौड़कर बाहर गया और एक खद्दर धारी व्यक्ति को लेकर आया । उस आदमी के लाल दमकते चेहरे को देखने से ही लगता था कि वो माँ के दूध के बाद केवल जूस का ही सेवन कर रहा है । उसने  हमें देखकर अपना पंजा हिलाया । 

भोला शंकर ने उसे तुरंत टोका - अबे, कुटिल मुनि ! महाराज ये हैं , तू इन्हे आशीर्वाद देने आया है या लेने । चरण स्पर्श कर और महाराज को अपना पंजा हिलाने दे ।   

कुटिल मुनि ने कहा - क्षमा करें महाराज , हमारा धर्म एक ही ईश्वर की पूजा करने की इजाजत देता है और राजमाता के सिवा किसी के आगे अपना सर नहीं झुकाते । 

हमने कहा - वाह रे मेरे कोहेतूर , जब राजमाता के चरणवन्दन में कोई तकलीफ नहीं तो फिर वन्देमातरम कहने में क्या दिक्कत है ? 

भोला शंकर अपनी दक्षिणा पेंशन का मामला बिगड़ता देख बीच में बोल पड़ा - जाने दें महाराज , नादान है । आप तो इन्हे बताये की सरकार बनेगी की नहीं ? 

हमने कहा- खैर चाहे कुछ भी हो जाये पर मैं दावे के साथ कहता हूँ कि सरकार बनना तय है ।  

इतना सुन कुटिल मुनि की बाँछे खिल गई और अपना चरित्र बदलकर साष्टाँग प्रणाम किया और जोर से बोला - वन्देचीनीउँगलीमहाराज । 

कुछ समय बाद भोला दूसरे क्लाईंट को लेकर आया । माथे पर कुमकुम चन्दन से बना त्रिशुल , काँधे में गेरूआ दुपट्टा । देखने से ही लगता था कि नया नया दीक्षा लिया है और किसी बड़े सप्लाई आर्डर की फिराक में है । 

सामने आते ही उसने अपनी तीन उँगली निकाली और बोला - महाराज नमो नमो । 

भोला शंकर भड़क गया ,  बोला - अबे नवीन दीक्षित, तू यहाँ कोई रैली में नहीं आया है । चुनाव खतम हो गये हैं, अपनी तीनों उँगली अन्दर रख ।  अगर महाराज ने अपनी चीनी उँगली कर दी तो फिर ना उठ पायेगा ना बैठ पायेगा । तमीज से प्रणाम कर  । 

दीक्षित सकपकाया और सर झुकाते हुए बोला - प्रणाम , भाई साहब । 

भोला ने भुनभुनाते हुए मेरे कान में कहा - महाराज , इनकी यही दिक्कत है , अपने दादा के उम्र के लोगों को भी भाईसाहब कहते हैं । 

हमने कहा - क्या मतलब है तेरा , हम क्या इतने उम्रदराज है ? 

भोला ने कहा - नहीं महाराज , हम तो यूँ ही बता रहें है - जस्ट फॉर यूवर काईण्ड इंफोर्मेशन । 

अच्छा , फेर ठीक है । और हमने उसके तंत्र मंत्र पर नैसर्गिक विश्वास के चरित्र को भाँप कर कुछ बुदबुदाया और अपनी चीनी उँगली को इधर उधर हिलाते हुए कुछ गणना करने जैसा अभिनय कर कहा -  अखबार , सर्वे चाहे कुछ भी कहें , सरकार तो बननी तय है  । 

दीक्षित का चेहरा कमल जैसा खिल उठा और हाथ जोड़कर बोला - महाराज के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम । 

फिर जोर से एक नारा लगाया " कहो दिल से ... चीनी उँगली महाराज फिर से ।"   


भोला दोनो को किसी तरह विदा कर पुन: वापस आया और बोला - महाराज आप तो कभी झूठ बोलते नहीं फिर आज क्यूँ ? 

हमने कहा - अबे हमने न कभी झूठ बोला है और ना बोलेंगे । 

भोला चिढ़ते हुए बोला - तो ई बताओ इन दोनो पार्टी का सरकार कैसे बनेगा ?  क्या दूनो पार्टी मिलकर सरकार बनायेंगे ? 

हमने कहा - बेटा भोला शंकर ना तो राजमाता कभी ठीक से हिन्दी बोल पायेंगी और ना नमो टोपी पहनेगा इसलिए गठजोड़ का तो कोई चांस ही नहीं है ।

तो फिर दोनो की सरकार कैसे बन सकती है ? बेवकूफ बनाने की भी हद होती है ? - भोला अब लगभग करूणा बुआ के तेवर में आने लगा था । 


हमने उसके तेवर को भाँप अटल स्वर में कहा - देख बे , हमने दोनो को कहा है कि सरकार का बनना तय है लेकिन ये अभी तक नहीं कहा "किसकी बनेगी"  

चल जा और नहाकर आ , मुझे कुछ जलने की बदबू आ रही है । 

2 टिप्‍पणियां:

  1. छत्तीसगढ़ चुनाव परिणाम पर ताजा व्यंग ,

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  2. बेटा भोला शंकर ना तो राजमाता कभी ठीक से हिन्दी बोल पायेगी और ना नमो टोपी पहनेगा इसिलए
    गठजोड़ का तो कोई चांस ही नही है । सरकार त पक्का बनहि गुरुदेव :)

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