शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

चाय चर्चा ऑन मिसरा ठेला


भोला शंकर आज सुबह सुबह गली में चाय के ठेले पर ही टकरा गया । बोला – महाराज, एनी स्पेशल न्यूज ऑर मेसेज फॉर वेलेंटाईन ग्रीन डे?
 
हमने कहा – साले क्या खाक भेलेंटाईन डे । पूरा साठ हजार का चूना लगा है । 
भोला बोला – उ कईसे महराज ? कौनो स्पेशल विदेशी माल है का ?  
हमने उसे गुर्रा के कहा – क्या मतलब है बे तेरा ? भोला बोला – माने के पूछ रहें हैं के कौन स्पेशल सुरा सुंदरी है जो ऐत्ता मँहगी है । 
हम कहा – नई बे कल टाईम्स नाऊ पर अर्नब को देख रहा था । 9-10 वाला स्लॉट छुट गया रहा, त  जाते जाते अर्नब ने कहा था कि 11 से रिपीट टेलीकास्ट भी होगा इसलिए 11 बजे से उसका रिपीट देखने बैठ गया ।

पर साला किस्मत को ये मंजूर नहीं था । दुर्भाग्य से हमारी पर्शनल शिन्दे भी अपना फेवरेट सास बहू टाईप का कोनो नौटंकी नहीं देख पाई थी और उसका भी रिपीट टेलीकास्ट 11 बजे ही है । सो जाहिर है घर में सुख शांति बनाये रखने के लिए कुर्बानी तो बकरे का ही होना था । सो हम कट गये अर्थात हमारे हाथों से रोमोट का बलात अधिग्रहण ठीक उसी प्रकार कर लिया गया जैसे चुनाव आयोग द्वारा लोगों की व्यक्तिगत गाड़ियाँ अधिग्रहित की जाती हैं ।

मैं पिंजरे में बन्द पंछी की तरह छटपटा सकता था लेकिन हमने भी बी आर चोपड़ा की महाभारत कथा देख रक्खी है । जब एकलव्य सामने खड़ा हो तो द्रोणाचार्य के कुत्ते को नहीं भौंकना चाहिए । सो इस कथा से प्रेरणा लेकर हम भी ठीक उसी प्रकार चुपचाप बैठ गये जैसे मोफलर चाचा गन्ना खुजारे के पीछे रासलीला मैदान में बैठ जाता था ।


टीवी में एकता बुआ का मस्ट नौटंकी आ रहा था । हमने पूरी हिम्मत बटोर कर पर्शनल शिन्दे से पूछा – मैडम ई नौटंकी का क्या नाम है । उसने कॉफी के मग को होंठों से लगाकर सरकारी इंक्वारी के लहजे में बताया - @#$% अकबर । पहला शब्द इसलिए नहीं लिख रहें हैं क्योंकि ऊ हमको थोड़ा अश्लील टाईप का लगा ।  लेकिन हम सोचे साला लेट नाईट शो है और कल वेलेंटाईन बाबा के बर्थडे भी है तो कुछ टिप्स देने के लिए झमाझम टाईप का दिखा रहा होगा । इसी उम्मीद में अपनी खुशी को अन्दर ही अन्दर दबाकर, मुँह लटकाये हुए टीवी की ओर टकटकी लगाये बैठे रहे ।


भारत निर्माण के लिए गये ब्रेक में मीलों आगे जाने के बाद जब नौटंकी फेर चालू हुआ तब हमने देखा कि नौटंकी का नाम तो जोधा अकबर है । खैर टीवी पर किसी पीर बाबा के मजार में उसका चेला आकर बताता है कि बाबा कोई "आम आदमी" का जोड़ा आया हुआ है । आपसे मिलना चाहता है । बाबा ने कहा – आने दो ।



हमने सोचा - ओ तेरी , मोफलर चाचा यहाँ भी पहुँच गया क्या ? लेकिन ये एकता बुआ का नौटंकी है इसलिए इसमें मोफलर चाचा नहीं एक सुन्दर का बाँका जवान अपनी टंच बीबी के साथ बाबा के सामने आया । हम मन ही मन बहुते मुस्कियाये के एकता बुआ ने जवान अकबर को जब बेवजह जंगल में लाया है त कुछ ना कुछ स्पेशल करवायेगी, माने के टार्जन स्टाईल में ।

त पीर बाबा बोले – कहो शहँशाह जलालुद्दीन अकबर , कैसे आये हो ?

बाबा का चेला भी भोलाशंकर टाईप का मुँह लगा था । अकबर के बोलने से पहले ही टोक पड़ा – बाबा, आप इन्हे शहँशाह अकबर कह रहें है, लेकिन ये तो “आम आदमी” है ।

बाबा एकदम श्याणा था । अब बाबा क्या घण्टा श्याणा होगा, वो तो एकता कपूर का स्क्रीप्ट रायटर श्याणा है जिसने फौरन इसमें एक मेसेज घुसेड़ दिया और बाबा के लिए डॉयलाग चिपकाया ।

पीर बाबा बोले – बच्चा, कोई भी आम आदमी अपने कर्मों से शहँशाह बन सकता है लेकिन बिरला ही शहँशाह से आम आदमी बनाता है ।

हमने सोचा,  ओ तेरी, इ त गजब का डॉयलाग है । साला ऐसा सीरीयल देखूँगा तो भयंकर टाईप का मसाला मिलेगा और अपनी शिन्दे की भी किरपा बनी रहेगी, कहाँ अपन अर्नब के नेशन वांट्स टू नो के झाँसे में आ गये ? इसी खयाल में डूबकर हम मुस्किया रहे थे तो हमारी शिन्दे ने मौका देखकर जिद पकड़ लिया – सुनो हो हमरे झीन्गालाला, गाड़ी पुराना हो गया है , हमको आजे च एक ठो होण्डा का एक्टिवा वेलेंटाईन गिफ्ट में चाहिए, वरना आज बेलन ट्राई डे भी हो सकता है , समझे ।

हमारे पिटने की उम्मीद जागती देख भोला तपाक से पूछा – फेर महाराज, इस नाजायज डिमाण्ड को पूरा करोगे ? माने पूछ रहें है ?

हमने कहा – अबे, इ कोई नाजयज रिक्वेस्ट नई है , ऑर्डर है आर्डर । आर्डर माने बूझता है ना ? अगर लाकर नहीं देंगे तो बेलन ट्राई डे पक्का है ।

खैर छोड़, उ त अभी दुकान खुलते ही ला देंगे, मगर इ पीर बाबा के डॉयलाग से अब मोफलर चाचा और पप्पू चाँदी के भक्तगण भारी खुश हो सकते हैं । माने के पप्पू चाँदी भी रोजे अपने बलिदानी खानदान के शान-ओ-शौकत को छोड़कर गरीब दलित के यहाँ खाना खाकर आम आदमी बन रहा है और सुना है उधर मोफलर चाचा भी इस्तीफा देकर खास आदमी से फेर आम आदमी बनने का नौटंकी करने वाला है ।

इ पूरा वाक्या को चाय ठेला वाला मिसरा बड़े ध्यान से सुन रहा था । बोला - सुनिये ऐय महाराज, हम ज्यादे पढ़ा लिखा त नहीं हूँ, मगर हमरा एक बात आप गाँठ बाँध लो । गरीब का झोपड़ा में मिनिरल वाटर के साथ खाना खा कर फोटू खींचाने से कोई महान नहीं बन जाता । पाँच साल पहिले जिस गरीब के घर में बिजली लाने के लिए अमरिका से परमाणु समझौता करने का महान उपदेश दिये रहे, उ कलावती के घर में बिजली त छोड़ो, उसका चूल्हे का कोयला तक बेच खाये । और इ जो मोफलर चाचा आम आदमी से खाँस आदमी बना है ना, इ खाली खाँसेगा, करेगा कुछ नहीं । बिल्कुल मोहल्ले का खोरली कुकुर जैसे, माने के खाली भौंकेगा, काटेगा नई । इ दूनों को बिना मेहनत के फोकट में राजपाठ मिला है, इसलिए इनको पता नई है के चाय ठेला चलाने से राजकाज चलाने तक का पोजीशन हासिल करने में तशरीफ का कितना तेल निकल जाता है ।

हमने भोला के तरफ देखा और बोला – यार भोला, ई त टू-मच हो गया यार । कसम से, अगर हम दूजे किसम के आदमी माने के राघवबाबा जैसे होते त ई मिसरा को अपना बैलेंटाईन बना लेते यार ।

माने के साला जब टीवी में चाय ठेला पर चर्चा लाईभ दिखा रहा था, तब ई मिसरा कहाँ था ?    

1 टिप्पणी:

  1. पीड़ा भी हास्य को जन्म देती है...पहले सुना था ..आज देख लिया.. सहज ग्राह्य शब्दों के साथ बेहद रोचक प्रस्तुति,,,,,दिमाग ताज़ा हो गया :)

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