शुक्रवार, 2 मार्च 2012

विशेषाधिकार और अवमानना

यूँ तो अरविंद केजरीवाल ने जो सांसदो  के लिए बयान दिया उससे मैं निजी तौर पर सहमत नहीं हूँ परंतु यदि इस बयान को संसद की छत्र छाया में निवास करने वाले देश के रहनुमाओं और कुछ तथाकथित बुध्दजीवियों ने लोकतंत्र का अपमान और संसद की अवमानना बताया !

केंद्रीय केबिनेट में मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने स्तुतिगान क्षमता की चरमस्थिति को प्राप्त कर अपने कोयला मंत्रालय के नाम के अनुरूप एक सार्वजनिक चुनावी सभा में बयान दिया कि राहुल गाँधी जब चाहें तो रात के बारह बजे भी प्रधानमंत्री बन सकते हैं उन्हे कोई भी नहीं रोक सकता !


उनके इस बयान की समवेत स्वरों में उतनी तीखी आलोचना नहीं हुई जितनी केजरीवाल के बयान की हुई ! इस बयान के पीछे उनकी मूलभावना क्या है ये तो वही बता सकतें हैं लेकिन यदि केजरीवाल के बयान पर उनकी मूल भावनाओं को त्यागकर आलोचना हो रही है तो मेरी नजर में श्रीप्रकाश जायसवाल का ये बयान उससे भी बड़ा लोकतंत्र अपमान और संसद की अवमानना है !

मेरी अल्पबुध्दि के ज्ञान से भारतीय संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री लोकसभा के बहुमत दल का नेता होता है और उसे लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त होता है अर्थात यद्यपि तकनीकि रूप से प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है किंतु संविधान मूल भावना यह है कि लोकसभा के आधे से अधिक सदस्य अपने स्वविवेक और संसदीय क्षेत्र के प्रतिनिधी के तौर पर जिसे चुने वही प्रधानमंत्री होना चाहिए !

श्रीप्रकाश जायसवाल के अनुसार यदि राहुल गाँधी जब भी चाहें प्रधानमंत्री बन सकतें है तो इसका सामान्य अर्थ ये हुआ कि उनको ही व्यक्तिगत रूप से लोकसभा में बहुमत प्राप्त है, वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नहीं अर्थात जायसवाल जी की माने तो क्या मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बने रहने का कोई नैतिक अधिकार है ? क्या वे देश के क्षद्म प्रधानमंत्री नहीं हुए ? या फिर लोकसभा के बहुमत सदस्य राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं किंतु राहुल गाँधी ने लोकसभा के सांसदों के समर्थन को अपनी इच्छा से दिशा परिवर्तित कर स्वेच्छा से मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया हुआ है अर्थात मनमोहन सिंह लोकसभा के सदस्यों के समर्थन से नहीं किसी एक व्यक्ति विशेष की इच्छा पर प्रधानमंत्री बने हुए हैं !

क्या ये भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान का सीधा अपमान नहीं है ? क्या इसे संसद के अवमानना के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए ? और तो और किसी का रात के बारह बजे प्रधानमंत्री राष्ट्र पर संवैधानिक संकट या वर्तमान प्रधानमंत्री के साथ अचानक किसी अनहोनी घटना होने पर ही होता है ! इसका अर्थ भी ये लगाया जा सकता है कि बकौल जायसवाल राहुल गाँधी कभी भी संवैधानिक संकट पैदा करने की ताकत रखते हैं !

इससे ये कयास बिल्कुल भी ना लगायें कि राहुल गाँधी ऐसा करेंगे क्योंकि ये सारी संभावनायें जायसवाल के बयान पर निर्मित हो रहीं है राहुल गाँधी से इसका कोई सम्बंध नहीं !

श्री जायसवाल का बयान इन अर्थों में भी गंभीर है कि ये बयान प्रधानमंत्री के केबिनेट का ही एक मंत्री दे रहा है अर्थात उसे अपने ही केबिनेट मुखिया पर यकीन नहीं कि उसे सही मायनों में बहुमत प्राप्त है ! क्या इसे संसद का अपमान नहीं  कहा  जा सकता ? क्या यह संविधान की मूल भावना और एक संवैधानिक पद प्राप्त प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता पर हमला नहीं है ? क्या भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों से इतर सांसदो और मंत्रियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हेतु संविधान में पृथक से विशेष अधिकार प्राप्त है ?  

इस पर और भी कई गंभीर सवाल किये जा सकते हैं लेकिन मैं सांसद या मंत्री नहीं अत: शायद मुझे अवमानना की अपराधी ठहराया जा सकता है अतएव आप श्री जायसवाल के बयान के संदर्भ में इन बातों पर स्वयं चिंतन कर निर्णय लें कि क्या ये संसद और लोकतंत्र का स्पष्ट अवमानना और अपमान नहीं है ?

निवेदन -  इस लेख हेतु मुझे कोई विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिलता है तो अन्ना की टीम की तरह आर्थिक और कानूनी मदद देने को तैयार रहें ! इतना तो आपका नैतिक दायित्व बनता ही है  !!  JJJ !!  


नोट – कृपया चंदा देने के इच्छुक मैसेज बाक्स का प्रयोग करें! आयकर वालों की पैनी निगाह बनी रहती है !!JJJ!!
  




11 टिप्‍पणियां:

  1. क्या इसे संसद का अपमान नहीं कहा जा सकता ? क्या यह संविधान की मूल भावना और एक संवैधानिक पद प्राप्त प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता पर हमला नहीं है ? क्या भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों से इतर सांसदो और मंत्रियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हेतु संविधान में पृथक से विशेष अधिकार प्राप्त है ?

    उत्तर देंहटाएं
  2. जाहिर सी बात है कि मनमोहन जनता का विश्वास और मत प्राप्त कर प्रधानमंत्री नही बने हैं बल्कि उसके लिये वे सोनिया गांधी और उनके सलाहकारो पर निर्भर है। ऐसे मे आपका सवाल ही बेमानी है। प्रधानमंत्री जिस क्षण चाहे बदला जा सकता है उसके बदले जाने सेकांग्रेस पार्टी का एक वोट भी कम होने वाला नही है। और यही इस देश का दुर्भाग्य है और कठपुतली मन्नी नोट लिखवाता है कि प्रधान मंत्री को 2G लाईसेंस मामले से दूर रखो मत लब क्या है कि वह जान रहा है कि घोटाला हो रहा है और उसे रोकने का न खयाल उसके मन मे है और न ताकत

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इसका अर्थ तो फिर यही हुआ ना दवे बाबू कि मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री बने रहना ही लोकतंत्र और संविधान की मूल भावनाओं के विरूध्द है !

      हटाएं
  3. मुझे चंदा देने को इच्छुक खुले आम चंदा दे सकते हैं मैं चंदे पर आय कर चुकाता हूँ

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हा हा हा चलो फिर सारा चंदा आप ले लें और फिर मेरे लिए भी आप केस लड़ेंगे ही मुझे यकीन है :):)

      हटाएं
    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

      हटाएं
  4. Sanjay ji, aapki is baat ka pura samarthan hai ki Kejariwal Tatha Jaisawal dono ki baten galat hain, par tathya ke HISAB se dono sahi hai. Ye ki Sansad me jadatar atyachari baithe hain, dusra ye bhi ki Rahul jab chahe PM ban sakta hai.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका कहना सही है मैं तथ्यों की बात नहीं कर रहा ..लोकतांत्रिक प्रणाली और संसदीय व्यवस्था के अपमान और निरादर की बात कर रहा हूँ ! केंद्रीय केबिनेट का मंत्री ऐसा बयान दे कि उसके प्रधानमंत्री बहुमत पर नहीं किसी की कृपा पर बने हुए हैं !

      हटाएं
  5. यह विडम्बना ही है की देश का संचालन एक ऐसा व्यक्ति कर रहा है जिसे संसद का विश्वास हासिल नहीं..........वरन उसे एक ऐसे व्यक्ति का विश्वास हासिल है जिसे संसद का विश्वास हासिल है.......अब उस व्यक्ति का पुत्र यदि देश के संचालनकर्ता को जेब में रखने का दंभ भरे .......और उसके चमचे चाटुकारिता की हदें पार करते हुए उसका दावा......तो आश्चर्य कैसा.......

    उत्तर देंहटाएं
  6. आजकल यही हो रहा है, मुंह खोला और भक्‍क से बोल दिया.....
    केजरी बाबू और जायसवाल जी भी इसी श्रेणी के लोग हैं।

    उत्तर देंहटाएं