रविवार, 25 नवंबर 2012

मोदी , मॉफी और मुसलमान

पिछले तीन दिनों से दूर-दर्शन मीडिया से दूर हूँ और आने वाले तीन दिनों तक भी यही स्थिति बनी रहेगी । लेकिन आज प्रात: दैनिक अखबारी भास्कर के दर्शन का अवसर मिला । एक छोटे से कालम पर नजर टिकी । जिस पर लिखा था – “ मोदी अगर मॉफी माँगे तो चुनाव में समर्थन”

खबर के कालम साईज को देखकर लगा कि कोई महत्वपूर्ण खबर होगी । जिसे ना चाहते हुए भी मजबूरी में छापना पड़ा होगा । खैर ये एमबीए सम्पादक की मजबूरी है या कर्तव्य इस पर बहस करने का कोई अर्थ नहीं लेकिन उनका सच्चे मन से कृतज्ञ हूँ कि विज्ञापनो और पेडन्यूज की भीड़ में मुद्दे की खबरों को अखबारों से ढूँढ-ढूँढ कर पढ़ने की कला तो उन्होने मुझे सिखा ही दी है ।

इस खबर के अनुसार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मुस्लिम संगठनों ने समर्थन की पेशकश की है। लेकिन इसके लिए शर्त रखी है। मुस्लिमों की 10 संस्थाओं की ज्वाइंट कमेटी ने कहा है कि मोदी यदि 2002 में हुए गुजरात दंगों के लिए माफी मांगते हैं तो उन्हें समर्थन की अपील की जा सकती है।

ज्वाइंट कमेटी के चेयरमैन सैयद शहाबुद्दीन ने शनिवार को कहा कि 'मुसलमानों के लेकर मोदी के नजरिए में बदलाव आ रहा है। मोदी और भाजपा गुजरात विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को खास तवज्जो दे रही है। लेकिन देश का मुस्लिम समुदाय 2002 का दंगा भूला नहीं है।' उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का दावा करने के बजाय मोदी मुस्लिम बहुलता वाली 20 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारें।

आबादी के हिसाब से मुस्लिमों को प्रतिनिधित्व दें। शहाबुद्दीन ने कहा कि गुजरात में मुस्लिमों की आबादी 10 फीसदी है। ऐसे में एक-दो टिकट मुस्लिमों को देने का कोई मतलब नहीं है। शहाबुद्दीन ने 1984 के दंगे की तर्ज पर 2002 के दंगा पीडि़त मुस्लिमों के लिए मुआवजे की मांग की।

पूर्व आईएफएस ऑफिसर शहाबुद्दीन ने कहा कि 'हम मुस्लिम वोटरों को सलाह देते हैं वे अपना मत बंटने नहीं दें। एक साथ किसी एक को धर्म और पार्टी से ऊपर उठकर वोट करें। जो शिक्षा और रोजगार के साथ विकास के हर स्तरों पर हिस्सा सुनिश्चित करेगा, मुसलमान उसी को वोट देंगे।'

इस ज्वाइंट कमिटी के संगठन में जमीयत-उल-उलेमा हिंद, जमात-ए-इस्लामी हिंद, ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुशावरत, ऑल इंडिया मिली काउंसिल, मूवमेंट फॉर इंपावरमेंट ऑफ मुस्लिम इंडियंस, ऑल इंडिया मोमिन कांफ्रेंस, ऑल इंडिया शिया कांफ्रेंस, मरकाजी जमीयत-अहले हदिथ, इमारत-ए-शरिया और ऑल इंडिया मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी शामिल है ।

मैं व्यक्तिगत रूप से उनके इस बयान का स्वागत करता हूँ कि मुसलमान वोटर धर्म और पार्टी से उपर उठकर शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर वोट दें । संविधान में लोकतंत्र की यही मूल आत्मा है । लेकिन उनके बयानो में उल्लेखित शर्तों से कई प्रश्न चिन्ह भी लगते हैं ।

क्या मोदी के केवल मॉफी माँगने से उनका कलंक धुल जायेगा और वे निर्दोष हो जायेंगे और यदि मॉफी नहीं माँगेंगे तो वे मौत के सौदागर कहलायेंगे ? मैं मोदी के इस बयान से पूरी तरह इत्तेफाक रखता हूँ कि उन्हे भारतीय संविधान और कानून के प्रावधानों के अनुसार न्यायालय द्वारा या तो निर्दोष घोषित किया जाय या फिर दोषी पाये जाने पर उन्हे विधि सम्मत सजा दी जाय । दोनो ही स्थिति में मॉफी माँग कर बरी होना गलत है ।

क्या धर्मनिरपेक्ष प्रमाण पत्र लेने के लिए मुसलमानों को उनकी आबादी 10%का दुगुना यानी मुस्लिम बाहुल्य वाले सभी 20सीटों पर टिकट देना अनिवार्य है चाहे वहाँ कोई अन्य धर्म का व्यक्ति मुसलमानों से ज्यादा योग्य और लोकप्रिय उम्मीदवार हो ?

क्या मुसलमानों को केवल उनके बाहुल्य वाले इलाके में ही टिकट देना चाहिए ? यदि गैर मुस्लिम बाहुल्य वाले सीटों पर कोई योग्य और लोकप्रिय मुसलमान हो तो भी उसे टिकट नहीं देना चाहिए ?

क्योंकि यदि जाति और साम्प्रदायिक बाहुल्यता के हिसाब से टिकट दिया जायेगा तो इसके मायने ये हैं कि आप वोट की उम्मीद भी जातीय और साम्प्रदायिक आधार पर ही कर रहें हैं शिक्षा और विकास के आधार पर नहीं ।

सत्ता में विकास के आधार पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उसमें इमानदारी से सक्रिय होकर पहले अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए ना कि शर्तें लादकर धर्म के नाम पर संख्याबल दिखाकर अपनी सौदेबाजी । पहले विकास की राह पर लोककल्याणार्थ अपना निस्वार्थ योगदान सुनिश्चित करें, सत्ता में भागीदारी के लिए कोई भी आपको नहीं रोक सकता ।

अगर मोदी और मुसलमान के बीच की कड़ी मॉफी ही है तो ये बड़ी खतरनाक शर्त है कि आप नंगा नाच करो और फिर मॉफी माँगकर फिर से शोषण । लेकिन मर्जी है आपकी,आखिर सर है आपका । (धोने के हाथ वाले सेकुलर साथी सर के बजाय अन्य स्थान का भी प्रयोग कर सकते हैं )

माफी देते रहिए, और अखिलेश पैदा कर उत्तम प्रदेश बनाईये ।

1 टिप्पणी:

  1. इस माफ़ी खबर पर आपकी प्रतिक्रिया सटीक लगी|
    आपका यह लेख भास्कर भूमि में अभी पढ़ा तो टिप्पणी के लिए आये बिना नहीं रहा गया :)

    http://bhaskarbhumi.com/epaper/inner_page.php?d=2012-11-26&id=8&city=Rajnandgaon#

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