सोमवार, 16 जनवरी 2012

या अन्ना हम ना हुए

एक दिन बस्तर के जंगलों में विचरण करते हुए अचानक गाँधी टोपी लगाये हुए सज्जन टकराये ! शकल कुछ जानी पहचानी सी लगी ! अरे ये तो किशन बाबुराव हजारे जी है जिसे पूरा देश प्यार और सम्मान से अन्ना कहता है ! हमने उनको सादर अभिवादन किया और कुशलक्षेम पूछा ! बोले स्वास्थ्य लाभ हेतु बस्तर के जंगल में आया हूँ सोचता हूँ कुछ दिन यहीं आत्ममंथन करूँ और तुम तो वही हो ना फेसबुक वाले महाराज ! हमने गर्व से सीना ताना और नजर झुका से विनम्रता के साथ कहा “ जी अन्ना जी ” ! हमारी विनम्रता देख अन्ना के आँखे नम हो गईं कंधे पर हाथ रख बोले महाराज काश इतनी विनम्रता केजरी किरण और कुमार में होती तो मेरी ये हालत ना होती !

अन्ना ने जरा शिकायती लहजे में पूछा- खैर ये बताईये महाराज आप तो पहले मेरे बड़े कट्टर समर्थक थे लेकिन आजकल खूब टाँग खींचते हो ऐसा क्यूँ ? मैंने कहा आदरणीय अन्नाजी आप बड़ी गलतफहमी में है, मैं क्या पूरा देश का कोई भी व्यक्ति आपका समर्थक नहीं था ! भ्रष्टाचार से त्रस्त हो कर आपके नेक इरादों पर भरोसा कर चलाये जा रहे जनलोकपाल आंदोलन का समर्थक था , और कमोबेश अंत:मन से आज भी हैं लेकिन आपके ये तीन खुजली वाले बंदरों की बेजा हरकतों और नीतियों ने पूरा मामला बिगाड़ दिया है और आप गाँधीवादी की जगह गाँधी के दो बंदर बने रहे ! अन्ना ने बीच में टोकते हुए पूछा महाराज दो क्यों और कैसे जरा स्पष्ट कीजीए ! हमने कहा कोशिश तो आपने तीनो बंदर को आत्मसात करने की थी लेकिन मौन व्रत में भी लिख –लिख कर खूब गरियाये तो गूँगा बंदर तो उछल भागा और आप दो बंदरों को भीतर दबाये टीम अन्ना के करतूतों पर अंधे और बहरे बने रहे जबकि करना ये था कि मौन रहते और आँख और कान दोनो खुले रखते, यही गलती की ! आप धृतराष्ट्र की तरह गाँधी का अंधा बंदर बने रहे और आपके दुर्योधन, दु:साशन , दुशाला और शकुनि मामा ने मदांध होकर ऐसे जुआ खेला कि मुम्बई में आपकी ही धोती दाँव पर लग कर खुल गई !

ये बात अगर कोई नेता कहता तो शायद अन्ना शिवाजी का रूप ले एक और मारो वाला जनसंदेश जारी कर हमे शरद पवार बनाने से नहीं चूकते लेकिन इस बार अन्ना बड़े गंभीर मुद्रा में चिंतित हो आये ! आखिर हम उनके ओमपुरी श्रेणी के प्रिय सहयोगी जो थे ! बोले महाराज बात तुमने बड़ी गंभीर कही है ! इन गधों के सामने बंदर बनने से काम नहीं चलेगा ! इसके लिए कुछ अलग रणनीति बनानी पड़ेगी !

हमने भी मौका देखकर अपना बिन माँगा सलाह ठोक दिया ! अन्नाजी देखिए हमारे पास एक धाँसू आईडिया है जमे तो बताईये लेकिन इसके लिए केजरी और कुमार विश्वास से सलाह मत लेना नहीं तो फिर आपका माथा गेरूआ रंग से पोत कर माईण्ड डायवर्ट कर देंगे ! अन्ना बोले नहीं महाराज तुम बताओ अभी यहीं फैसला कर लूँगा और जमेगा तो तुम्हारे आईडिया को अधिकृत घोषित कर दूँगा !


हमने भी उपर वाले को धन्यवाद दिया और बाबा के कपाल भारती का लोन चुकाने का निश्चय किया और कहा देखो अन्ना जी आपके पास मीडिया जनसमर्थन अभी भी है लेकिन संगठन शक्ति नहीं है ! बाबा के पास संगठन है लेकिन मीडिया स्वीकार्यता नहीं इसलिए आप दोनो मिल जाओ ! रही बात आरएसएस का दाग लगने का तो उसे भूल जाओ ! कोई भी उँगली उठाये तो सीधे जयप्रकाश नारायण जैसे डारेक्ट चेलेंज कर दो ! दो तीन दिन चिल्लायेंगे फिर भूल जायेंगे क्योंकि आप बिदकते हो इसलिए वो चिढ़ाते है ! फिर बाबा का संगठन और आपका चेहरा दोनो मिलकर बैण्ड बजाओ और गाओ " बोलो तारा रारा " फिर देखो कोलावरी से भी ज्यादा हिट ना हुआ तो कहना !

अन्ना बोले महाराज आईडिया तो तुम्हारा सॉलिड है ! स्वास्थ्य लाभ होते ही इसकी घोषणा कर देता हूँ लेकिन बाबा नाराज हैं, लगता है मानेंगे नहीं ! मैंने कहा देखो अन्ना जी आपकी ये कौरव सेना मिडिया में क्या कह रही है हमारा आंदोलन चौराहे पर खड़ा है इससे ज्यादा बेईज्जती की और क्या बात होगी ! इधर आप घोषणा करो, उधर हम बाबा से घोषणा करवा देंगे फिर हमारी भाँड मीडिया आप दोनो का राम-भरत मिलाप करा ही देगी ! लेकिन ध्यान रहे दोनो को " रामेश्वरम " टाईप का आपसी भाव रखना पड़ेगा !

अन्ना बोले महाराज ये रामेश्वरम वाला कौन सा भाव है! हमने कहा देखिये जब लंका जाने के लिए भगवान श्रीराम ने सेतु निर्माण के पूर्व समुद्र तट पर शिवलिंग बनाकर उसे रामेश्वर कहा तब उसका अर्थ क्या बताया “रामस्य ईश्वरः यः सः रामेश्वर: “ अर्थात जो राम का ईश्वर है वो रामेश्वर है मतलब रामेश्वर भगवान शिव हैं ! अन्ना बोले बिल्कुल ठीक ! जवाब में शिव ने क्या कहा “रामः ईश्वरोयस्य सः रामेश्वर:” अर्थात राम जिनके ईश्वर है वही रामेश्वर है ! अन्ना ने कहा अरे वाह ये तो बड़ी अच्छी जानकारी दी लेकिन इसका मेरे और बाबा से क्या सम्बंध है !

हमने कहा बिल्कुल सम्बंध है आप दोनो ही देश हित में काम कर रहे हो ! दोनो का उद्देश्य निज हित से उपर जनहित में है इसलिए दोनो के बीच कौन श्रेष्ठ है इसका कोई औचित्य नहीं ! अत: कोई भी मीडीया में पूछे दोनो में कौन नेतृत्व कर रहा है तो रामेश्वर वाला भाव लाकर एक दूसरे का नाम लेना और कहना मैं उनका सहयोगी हूँ ! बस फिर देखो कमाल !

अन्ना को बात जम गई बोले महाराज अभी तक कहाँ थे ! हमने कहा मैं तो यहीं पैदाईशी बस्तर में हूँ कोई NGO वाला नहीं जो बस्तर का माल दबा के दिल्ली में बैठ कर हाय हाय करे ! ये तो आप ही हैं जो हमें कभी बुलाते नहीं और हमारा ब्लाग भी पढ़ते नहीं वरना ये आईडिया तो हम कब से सोच कर रखे थे ! अन्ना बोले तो फिर क्या केजरी और कुमार को टीम से निकाल दें !

हमने कहा नहीं निकालना नहीं हैं आखिर हैं तो हमारे अपने ही ! थोड़ा अहंकार हो गया था लेकिन मुम्बई के खाली मैदान ने सारा नशा उतार दिया है अब सब ठीक है ! उनसे कहें बस लक्ष्य से भटककर अनर्गल बयानबाजी ना करें ! बड़े मेहनती और समर्पित है , लगायें रखें उनको भी सब मिलकर आगे बढ़ें ! अन्ना बोले महाराज देखना तुम भी एक दिन इतिहास में अमर हो जाओगे ! मैंने कहा अब रहने दें अन्नाजी उस इतिहास में मुझे अपना नाम नहीं लिखाना जिसके कई पन्ने झूठ और फरेब से भरे पड़े हैं ! जिसमें वीर सावरकर को गद्दार कहा जाता है और शोभा सिंह को सर की उपाधि दी जाती है !

इतना सुनते ही अन्ना की कमजोरी ठीक हो गई, शरीर में नये उर्जा का संचार हुआ और चेहरे में अप्रैल 11 वाली पुरानी चमक वापस आ गई ! अन्ना बड़े प्रसन्न , उनको प्रसन्न देखकर हम भी प्रसन्न हो गये !

फिर अन्ना ने हमसे बिदा माँगी .. हमने कहा अन्नाजी एक पर्सनलटाईप का रिक्वेस्ट था अगर आप अन्यथा ना लें और इजाजत दे तो पूछूँ ! अन्ना ने कहा पूछो महाराज, बेझिझक पूछो ! हमने कहा ये आपने पीयक्कड़ो को जब से पीट-पीट कर सुधारने का आईडिया दिया है तब से हम बहुत पीड़ित हैं ! रोज शाम को हमारी निजी चिदम्बरम दिल्ली पुलिस के रोल में आ जाती है और सारी की सारी उतार देती है !

अन्ना ने कहा तो फिर छोड़ क्यों नहीं देते? हमने चहक पर कहा बस आप एक बार अपील कर दें तो आज ही तलाक दे दूँगा ! अन्ना ने कहा अरे मूर्खाधिराज महाराज हमने शाम की दवा छोड़ने को कहा है पत्नी को नहीं ! हमने उदास होकर कहा अन्नाजी बिना शाम की उर्जा दवा लिए हमें आईडिया नहीं आता ! अब हम छोड़ तो दें लेकिन आप सोच लें कभी भविष्य में आपको आईडिया की जरूरत होगी तो फिर हमसे मत कहियेगा !

अन्ना ने कहा ऐसा मत करिये महाराज हम घोषणा करते हैं कि पीना बुरा नहीं है पीकर बहकना बुरी बात है ! शाम की दवा लेकर साहित्य सृजन और देश को नई दिशा दिखाने हेतु आईडिया बनाने वाले जनसामान्य को राष्ट्रहित में आत्मबलिदानी घोषित किया जाता है !

हमने पूरी आत्मा से चिल्लाकर कहा
 “ या अन्ना हम ना हुए "
चीयर्स .. जय कालभैरव !!

4 टिप्‍पणियां:

  1. अन्ना जी आपके पास मीडिया जनसमर्थन अभी भी है लेकिन संगठन शक्ति नहीं है ! बाबा के पास संगठन है लेकिन मीडिया स्वीकार्यता नहीं इसलिए आप दोनो मिल जाओ !

    लाख टेक की बात.....

    लेकिन

    शराब वाले अंश पर

    पड़नी तय है.

    भाभी जी की लात....

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  2. मै तो कहता हु अन्ना क्या है? कुछ भी नहीं जीरो है लेकिन जिसके बगल में खड़े होजाय उसका मान दस गुना बढ़ा देते है , अंध भक्त तो मै भी नहीं ,लेकिन आज के समय में
    अकेले अन्ना में वो हिम्मत है जो आगे चलते है....
    अन्ना है सीधे सादे सरल स्वभाव के है किसी के लिए मन में कोई बैर नहीं है कोई दुर्भावना नहीं है , लेकिन दिन भर उनको जो दिखाया या सुनाया जता है,वो भी अपने आदमियों द्वारा,वे फिर उसी के अनुसार चलते है,

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  3. baaki rahi padne wali baat to bhai hamko ya aapko kyaa sab ko padti hai.....

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  4. अन्ना ,बाबा और गुरूजी(रविशंकर)ब्रह्मा विष्णु महेश जैसे ही हैं बस तीनो का ढंग से एकत्रित होना ही शेष है....

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