शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

जनरल का जन्मतिथि विवाद

आज भारत के 26 वें जनरल और वर्तमान में भारतीय सेना के चीफ जनरल विजय कुमार सिंह के जन्म तिथि विवाद के सम्बंध में जानकारी लेने का प्रयास किया ! तमाम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेना के ही कर्नल पिता के पुत्र जनरल सिंह को राजपूताना रेजीमेंट के 2 बटालियन में 14 जून 1970 को कमीशन मिला ! उनका जन्म सेना के ही पुणे स्थित अस्पताल में हुआ था ! जनरल सिंह के सुप्रीम कोर्ट में किये गये दावे के अनुसार विभिन्न शैक्षणिक दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 10 मई 1951 है ! जबकि सरकार का कहना है उन्होने अपने नेशनल डिफेंश एकादमी में आवेदन पत्र में अपनी जन्म तिथि 10 मई 1950 लिखा है , अत: वही उनकी जन्मतिथि है !


इस प्रकरण को विभिन्न स्तरों पर भी सुलझाया जा सकता था ! मसलन जनरल सिंह का जन्म सेना के अस्पताल में हुआ है अत: उनका रिकार्ड अस्पताल में होगा ही ! लेकिन इन विवादों में जनरल सिंह का दावा भी एक गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है कि उनके डिप्लोमा प्रमाण पत्र में भी जन्म तिथि 10 मई 1951 दर्ज है एवं इस जन्म तिथि को नकारने व आवेदन पत्र में अंकित जन्मतिथि को अधिकृत मानने की सूचना भी उन्हे वर्ष 2011 में दी गई ... अर्थात सेवा में आने के 41 वर्ष बाद !


मुद्दा इतना गंभीर नहीं था कि इसे सेना की प्रतिष्ठा दाँव पर लगाया जाता किंतु भारतीय इतिहास में सेना का मुखिया पहली बार सरकार के खिलाफ न्यायालय गया है ये अपने आप में एक बहुत बड़ी घटना है ! खैर वास्तविकता क्या है और कौन सच्चा है इसका फैसला तो सुप्रीम कोर्ट कर ही देगी लेकिन इन सब में कुछ गँभीर अनियमिततायें दृष्टिगोचर होती हैं ! यदि जनरल सिंह ने आवेदन पत्र में अपनी जन्मतिथि 10 मई 1950 लिखी है तो प्रवेश के समय उनके जन्मप्रमाण पत्र की जाँच क्यों नहीं की गई और यदि 1950 ही सही वर्ष है तो उनके डिप्लोमा प्रमाण पत्र में उसे 1951 क्यों अंकित किया गया ! उसके बाद इन दोनो ही स्थितियों में सरकार या प्रशासन 41 वर्षों तक क्यों खामोश रहा गया !  

इन सबसे इतर सुप्रीम कोर्ट में लम्बित मामले पर गौर किया जाय तो इस केस में विवाद का विषय है जनरल सिंह के प्रमाण पत्रों पर अंकित तिथि 10 मई 1951 और सरकार द्वारा मान्य उनके आवेदन पत्र में अंकित जन्मतिथि 10 मई 1950 में किसे अधिकृत जन्मतिथि मानी जाय ! सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो लेकिन हर सूरत में फैसले से बड़ा बवाल होगा ! यदि सुप्रीम कोर्ट जनरल सिंह के पक्ष में फैसला सुनाती है तो सरकार की किरकिरी यकीनन तय है ! इस मामले से फिर कई और बातों को जोड़ा जायेगा और सरकार की नीयत पर भी सवाल दागे जायेंगे ! दूसरी स्थिति में यदि सरकार के पक्ष में फैसला आता है तो भी यह एक महत्वपूर्ण फैसला होगा जिससे जन्म प्रमाण पत्रों की वैधानिकता और आवश्यकता समाप्त हो जायेगी ! आवेदन पत्रों पर अंकित जन्मतिथियों को ही वैधानिक मान लिया जायेगा चाहे आपकी जन्मतिथि कुछ भी क्यों न हो ! मामला जितना छोटा दिखता है उतना नहीं है ! कम से कम सरकार के लिये तो ऐसा कहा जा सकता है ! अब देखना है सरकार इससे बचने के लिए क्या कदम उठाती है क्योंकि फैसला कुछ भी हो सरकार की मुश्किलें बढनी तय है !

3 टिप्‍पणियां:

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  2. आपको तथ्यो की सही जानकारी नही उनकी जम तिथी अस्पताल के रिकार्ड से भी 195१ ही है और शैक्षणिक प्रमाणपत्रो मे भी। 195० की तिथी केवल एनडीए प्रवेश परीक्षा के आवेदन पत्र पर क्लर्क के गलती से दर्ज कर ली गयी। उस के कुछ समय बाद से ही उन्होने तिथी परिवर्तन का आवेदन दे दिया था। पर शायद उस पर कार्यवाही सतत जारी नही रखी विवाद तब उठ खड़ा हुआ जब उनकी वरीयता सेनाध्यक्ष बनने की हो गयी और उनके सेनाधय्क्ष बनने की नौबत नजर आने लगी। उनसे जूनियर अधिकारी विक्रम सिंग उनकी तिथी १९५१ होने की सूरत मे रिटायर हो जायेंगे और सेनाध्यक्ष नही बन पायेंगे। यह श्रीमान लंबे समय से हथियार खरीद मे बड़ी भूमिका निभाते रहे है जबकी सेनाध्यक्ष इमानदार आदमी होने के कारण रक्षा रणनीति संभालने के विभाग मे रखे गये थे। सेना मे वरीयता क्रम पहले से ही तय रहता है और सेनाध्यक्ष बनने का भी सो विक्रम सिंग के प्रभाव से उस समय इनके द्वारा अपनी जन्म तिथी सुधारने के सारे प्रयासो को दबाया जाता रहा। और अपने हर प्रमोशन के समय सेनाध्यक्ष ने उम्र संबंधित आपत्ती को दर्ज कराया है। अखबारो मे सेनाध्यक्ष की उम्र को लेकर जो नकारात्मक खबरे आती रही है उनमे भी विक्रम सिंग और उनके मित्रो का ही हाथ है। अदालत मे तो सेनाध्यक्ष की जीत तय ही है लेकिन उनका रिटायर कर दिया जाना भी तय ही नजर आ रहा है कारण तो आप भलीभाती समझ ही चुके होंगे

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  3. सरकार की ही किरकिरी होनी है ...इस मुद्दे को पहले ही निपटा लेना चाहिए था

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