गुरुवार, 30 अगस्त 2012

कुलटा - एक सेकुलर कहानी


आइये मैं आपको एक सेकुलर कहानी  सुनाता हूँ । मानक प्रतिमान हैं आप जरा तात्कालिक घटनाओं को मानस पटल पर रखेंगे तो कहानी आपको एक नया संदर्भ दे जायेगी ।

एक शराबी रोज दारू पीकर जब अपने घर के सामने पहुँचता तो घर की कुंडी खोलने से पहले पड़ोसी के घर के सामने खड़े होकर उसे गाली देकर कहता कि तुम नपुंसक हो, नामर्द हो ।

पड़ोसी तिलमिला जाता लेकिन वह उस शराबी के मुँह लगने के बजाय खून के घूँट पी कर चुप रह जाता । लेकिन एक दिन उसके सब्र का बाँध टूट गया और वह गुस्से से शराबी को सबक सिखाने घर से बाहर निकला ।

ये बात जैसे ही रसोई बना रही उसकी पत्नी को पता चली वह दौड़ती हुई दरवाजे की ओर आई और अपने पति को घर के अंदर खींचती हुई कहने लगी – “ जाने दीजिए न
, वो तो पिया है , आप तो नहीं है ना । ”
दूसरे दिन सुबह खबरनवीशों ने इसे ब्रेकिंग न्यूज बनाया “महिला ने अपने पति के मुँह पर ही उसके पति होने से इंकार करते हुए पड़ोसी को पति माना । पड़ोसी द्वारा पिछले कई दिनों से किये जा रहे दावा सही निकला ।

फिर शाम को प्राईम टाईम बहस पर समाज के वामहस्ती बुध्दजीवी ठेकेदारों ने समवेत स्वर में फैसलानुमा राय व्यक्त किया “कल रात महिला के बयान से ये सिध्द हो गया है कि वो शादीशुदा होते हुए भी किसी दूसरे पुरूष को अपना पति मानती है । ऐसी महिलाये समाज के लिए कलंक हैं इन्हे बहिष्कृत करना चाहिए और उस शराबी के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए जिसने अपनी मानमर्यादा की परवाह किये बिना ऐसी नारी का चरित्र उजागर किया ।
सेकुलर वामहस्ती बुध्दजीवियों की जय हो ... बात समझ आ गई हो तो लाईक का बटन चिपिया कर दू शब्द कामेन्टिया दो ।  

2 टिप्‍पणियां:

  1. ise kahte hai "arth ka anrath" patni ne socha ki kichad me pattar marne se kya milega....par hua ulta...arth ke anrath ne puri ijjat ko hi kichad me mila diya.... dhany hai aap...

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  2. लाइक का बटनवा तो नजर नाही आया..कमेंटिया चिपका दिया है..जय हो..

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