रविवार, 2 अक्टूबर 2011

लेटर टू बापू ऑन हिस बर्थडे



मेरे नेशनल फादर बोले तो बापू ...

गुड मार्निंग एंड हैप्पी बर्थ डे टू यू
 

यहाँ कुशल गुसल है मेरे सांई
वहाँ कुशल तुम जानो रघुराई 

लिखना हाल समाचार ये है कि हमे यकीन है तुम स्वर्ग में भी रहकर खुश नहीं होगे क्योंकि तुम्हे तो हमेशा से दूसरों के लिए परेशान रहने की बीमारी थी इसलिए तो शायद अच्छा खासा बैरिस्टर का काम धाम छोड़ दिया ! अपना कोट पैंट उताकर लगोंटी पहन ली और चले देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने !  

हमें यहाँ अभी अभी कुछ दिन पहले ही सरकार द्वारा 26 रूपये से ज्यादा आमदनी होने के कारण अमीर घोषित कर सम्मान दिया गया हैं इसलिए ना चाहते हुए भी कहना पड़ रहा है कि इतने बम धमाकों और भूकम्प, बाढ़, सूखा जैसे प्राकृतिक विपदाओं के होते हुए भी बंदूको के साये में सुखी एवं प्रसन्नचित्त हैं ! जाहिर है पूर्णत: अकुशल ही होंगे ! 

बापू आगे समाचार ये है कि आजकल कुछ वर्षों से मंहगाई की समस्या ही समाप्त हो गई है ! ये मुई तो अब सोकर उठने से लेकर फिर से सोने तक हमारे दिनचर्या में श्वाँस की तरह शामिल हो गई है इसलिए अब सात जन्मों की हमसफर सी लगने लगी है ! इसलिए अब जिसके साथ जीवनभर चलना हो उसे सार्वजनिक रूप से समस्या भी तो नहीं कहा जा सकता ! यदि उसे हम ऐसा कहते हैं तो ससुरी मुँहफुला कर कहती है कि हमें समस्या कहते हो, दम है तो अपनी लुगाई को भी सार्वजनिक रूप से समस्या कह कर बताओ, तो जाने असली मर्द हो ! बस क्या बाबा बंगाली जैसी अपनी कमजोरी छुपाने के लिए अब चुप ही रहते हैं !  

कल ही कलमुँही चिढ़ाकर कह रही थी आधीवाणी बाबू , खूब हमें गँभीर समस्या बता रहे थे और कह रहे थे मँहगाई ने कमर तोड़ दी ! अब अगर दम है तो यही उपाधि जरा अपनी घरवाली गुज्जी बेन को देकर देखो, सिर ही ना फोड़ दे तो कहना !

और आपसे क्या कहें बापू, आपके ये चेले चपाटों की दया है, बड़ा खयाल रखते हैं हमारा, कभी तकलीफ में कोई कमी आने ही नहीं देते ! बस जाते जाते बापू तुमसे एक शिकायत थी हो सके तो दूर कर देना !  

ये तुम्हारे चेले चपाटे तुम्हारा बर्थ डे भी ठीक से नहीं मनाने देते ! दिन भर ये मुर्दाबादी तुम्हारे नाम का टोपी पहन कर अपने आप को गाँधीवादी बताते हैं ! तुम्हारे चौक चौराहों में खुले आसमान के नीचे भीगते सुखते थ्री डायमेंशनल फिगर जिसे साल भर फ्लाईंग एनिमल अपने वॉच टॉवर के रूप में इस्तेमाल करते हैको धो पोछकर माला चढ़ा अपने आप को गौरांवित महसूस करते हैं ! समझ में नहीं आता कि ये गाँधीवादी हैं या गाँधीबर्बादी हैं ! 

खैर जो भी हो मूल मुद्दा ये है कि अब तो आप भगवान से डाईरेक्ट बात कर सकते हो ! तो उनसे बोलकर इन गाँधीबर्बादीयों को जरा आप सन्मति दिलावाओ !  

अरे खुद तो आपका बर्थ डे ढंग से सेलीब्रेट करते नहीं और उपर से सारे देश में आज के दिन ड्राई डे घोषित कर हमें भी ढंग से सेलीब्रेट करने नहीं देते ! वो तो हम ओरिजनल पंजीकृत मोमबत्ती ब्रिग्रेडी बुध्दजीवी हैं इसलिए होशियारी से एक दिन पहले ही स्टॉक जमा कर लेते हैं और आपका हैप्पी बर्थ डे सेलीब्रेट करते हैं लेकिन आप तो जानते हैं हमारे देश की अस्सी प्रतिशत जनता गाँवो में रहती है और भोली भाली है इसलिए उनको बड़ी तकलीफ होती है ! कुछ बेचारे मजबूरी में ब्लेक में खरीदकर सेलीब्रेट करते हैं जो अच्छी बात नहीं हैं!

लेकिन इस वर्ष मुझे एक्स्क्यूज करेंगे क्योंकि जैसे ओमपुरी, अन्ना के अनशन के बीच में आ कर फँस गया था वैसे ही आपका बर्थडे अब के पित्र पक्ष के बीच में फँस गया इसलिए सेलीब्रेट नहीं कर पा रहा हूँ ! आशा ही नहीं बल्कि यकीन है कि आप मेरे दुख दर्द को समझ रहे होगें!  

आखीर में हमारे देश से वहाँ पधारे सभी गणमान्य महानुभावों को मेरा गुड आफ्टरनून कहना ! मुझे मालूम है वे लोग जो नर्क में होंगे वो तो वहाँ भी जुगाड़ कर ऐश कर रहे होंगे लेकिन जो आपके साथ स्वर्ग में होंगे उन्हे कहना हमारे लिए ज्यादा चिंता ना करें वैसे भी उन्होने अपना जीवन तो हमारे लिए बलिदान कर ही दिया है कम से कम अब वे चैन और सुख शांति से रहें !  

छोटे लाल बहादुर को मैंने अलग से एस एम एस कर हैप्पी बर्थ डे विश किया है शायद उन्हे मिल गया होगा ! अगर नेटवर्क जाम होने के कारण नहीं मिला हो तो उन्हे भी मेरी तरफ से हैप्पी बर्थडे विश कर देना !

वन्स अगेन हैप्पी बर्थडे टू यू व्हेरी मच एण्ड मेनी मेनी रिटर्न्स ऑफ द डे बट नॉट डिक्लियर्ड एस ए ड्राई डे ! चीयर्स .....

योर मोस्ट ब्लडी का फूल
काजू लाल चिरौंजीचीयर्स
आफिसर्स च्वाईस निवास
क्वाटर नं 1मेक्डावल रम
पोस्ट रायल स्टेग खम्बा
मुगल मोनार्च , एंटीक्यूटी 000420

बुधवार, 28 सितंबर 2011

इंडियन पाईरेट्स लीग और टीम इडली दोसा डेयर डेविल्स

IPL (इंडियन पाईरेट्स लीग) में टीम  आईथ्रीडीएट ID3  इडली दोसा डेयर डेविल्स के शुरूआती चार विकेट पतझड़ की तरह गिर गये ! राजाबाबू और कानीमाई तो सुप्रीम कोर्ट की पहले ही ओव्हर की यार्कर गेंदों पर क्लीन बोल्ड हो गये ! फिर कालीबाड़ी रैनाहेंडल दी बाल के लिए आऊट घोषित कर दिये और निधिपति द्रविड़ के रिटायर्डहर्ट होने के बाद टीम काफी दबाव में थी !

इसी बीच जनजूतार्दन टीम ने मौका देखकर मराठा स्टेट टीम के लेग स्पिनर अनशन वार्न को पार्टटाईम बालर के रूप में लगाया गया और चार ओव्हर मेडन डालकर उसने डेयरडेव्हिल्स टीम का रन रेट ही बिगाड़ दिया !

टीम इस सदमे से किसी तरह उबरती इसी बीच भरी दोपहरी में जनजूतार्दन टीम के मेनबालर पतंजली देव ने स्वयं ही गेंद अपने हाथ में लेकर अनुलोम विलोम स्विंग आक्रमण का हुँकार भरा ! पहले ही अपना रनरेट खो चुकी डेयरडेव्हिल टीम अब कोई रिस्क लेने की स्थिति मे नहीं थी ! अत: डूबती पारी को सम्हालने के लिए टीम के कुप्तान चुप्पी सिंह मौनी ने अपने रामभरोसे मंद बुल्लेबाज चिब्बू लिंगप्पा एवं पिंचू गांगुलीको दो रनर के साथ क्रीज सम्भालने भेजा !

शुरूआत में दोनो ने सम्भल कर खेला लेकिन रनरेट गिरता देख टीम की विदेशी कोच सोनी चैपल ने विडियो कांफ्रेसिंग के जरिये टीम मीटिंग में फैसला दिया कि एक छोर से आक्रमण किया जाय ! ऐसे में पिंचू गांगुली नें नान स्ट्राईक में रहकर अपना विकेट बचाना बेहतर समझा और चिब्बू लिंगप्पा को ये जिम्मेदारी सौंपी ! बस फिर क्या था चिब्बू लिंगप्पा ने पतंजली देव की मिडिल ओव्हर में ऐसी धुनाई की कि उनका पूरा स्पेल ही बिगड़ गया और वो वर्ल्ड कप में मनोज प्रभाकर की तरह स्पिन गेंदबाजी करने का मूड बनाने लगे !

इसी बीच जनजूतार्दन टीम के पार्टटाईम बालर अनशन वार्न चार ओव्हर मेडन डालकर खुद को मेन बालर के रूप में स्थापित करने के चक्कर में बैटिंग पावरप्ले के तुरंत बाद सोलहवें ओव्हर से गेंदबाजी करने की घोषणा कर दी ! अब डेयरडेविल्स टीम सदमें में आ गयी और टीम की विदेशी कोच सोनी चैपल को अचानक ब्लैकटेनिस एल्बो की चोट उभर आती है और वो डाक्टर आसांजे से सर्जरी करवाने अमेरिका के न्यूयार्क शहर स्थित व्हिस्की लीकेज हास्पिटल चली जाती है ! लेकिन जाते जाते मैच जीतने का जिम्मा एक सायकोलाजिस्ट डॉ अमूल और तीन फिजियो के जिम्मे छोड़ जाती है !

अनशन वार्न की पहली गेंद पर चिब्बू लिंगप्पा ने आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ते हुए गेंद स्टेडियम के बाहर भेजनी चाही लेकिन इस बार गेंद ज्यादा स्पिन हो गई जिससे वे चूक गये और स्टम्प आऊट होते होते बचे ! किसी तरह अम्पायर के साथ सेटिंग कर इसे वाईड बाल घोषित किया गया !

दो तीन गेंद के बाद अनशन वार्न की गेंद खतरनाक ढंग से टर्न लेना चालू किया तो दर्शकों का हूजूम भी स्टेडियम की तरफ दौड़ा और खचाखच भर गया ! मीडिया कामेंट्रेटर भी मौके की नजाकत देख अनशन वार्न को ब्रेडमेन के बाद सबसे महान खिलाड़ी बता अपनी TRP बढ़ाने लगे !

डेयरडेविल्स की टीम इस खतरनाक स्पिन को झेल नहीं पायी और उसने बालिंग एक्शन पर आपत्ति कर दी ! नियम बनाने वाली संस्था ICC इंडियन कांस्टीट्यूशन क्लब ने इस पर अपनी राय देने के लिए समय माँगा ! इसी बीच भैय्यूजी शास्त्री जिनका दोनो टीमों के खिलाड़ियों से पुराना सम्बंध है, को मध्यस्थ बनाकर अंदरूनी समझौता किया गया और खराब रोशनी की अपील कर मैच रूकवा दिया गया !

दर्शकों को एक्सपर्ट कमेंट्री टीम ने बताया कि डकवर्थ लुईस नियम से मैच ड्रा घोषित कर अनशन वार्न को मैन ऑफ द मैच दिया जाता है! यह मैच भले ही ड्रा हो गया किंतु  अनशन वार्न को दूसरा ब्रेडमेन घोषित कर दिया गया ! अब सारे खेलप्रेमी एक ही गाना गाते  हैं मैं भी अनशन, तू भी अनशन , अब तो सारा देश है अनशन “ !

चूँकि ये इंटरटेन्मेन्ट चैम्पियंस लीग है अत: मैच फिर चालू हुआ ! अब चिब्बू लिंगप्पा अपने ही साथी बल्लेबाज पिंचू गांगुलीके काल पर रन लेने दौड़े लेकिन रन आउट हो गये ! चिब्बू लिंगप्पा ने स्वयं को आऊट घोषित करने की क्षद्म पेशकश की लेकिन टीम की विदेशी कोच सोनी चैपल ने कुप्तान चुप्पी सिंह मौनी को रेफरल सिस्टम के अपील का उपयोग करने का निर्देश दिया! इसी निर्देश का पालन कर डिसीजन थर्ड वेम्पायर के पास भेजा गया है लेकिन कुप्तान चुप्पी सिंह मौनीको मालूम है कि चिब्बू लिंगप्पा क्लीयर आऊट हैं इसलिए शायद बार बार नोबाल नोबाल चिल्ला रहे हैं !

अब सारी कवायद इसी बात पर चल रही है कि किसी तरह DRS का लाभ उठाकर किसी एंगल से कोई रास्ता मिल जाये तो बेनिफिट ऑफ डाऊट बेट्समेन के फेवर में दिया सके क्योंकि ये तय है कि चिब्बू लिंगप्पा के आऊट होते ही कुप्तान चुप्पी सिंह मौनी को क्रीज पर बैटिंग करने आना पड़ेगा और फिर बात आगे निकल कर पुछल्ले बल्लेबाज राबर्ट नेहरा को भी बैटिंग़ करनी पड़ सकती है ! जिसे विदेशीकोच सोनी चैपलने विशेष प्रतिभावान खिलाड़ी बताकर टीम में जगह दिलाई है !  

मैच अभी रूका हुआ है जैसे ही बालिंग बैटिंग चालू होगी आपको आँखों देखा हाल बताने के लिए पुन: हाजिर रहुँगा !

पीते रहें तब तक और देखते रहें एक टक ! चीयर्स जय हो...

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

मेरा जीवन दर्शन

जीवन के बहुमूल्य 20 वर्ष पोथी पढ़ने में व्यतीत किया ! (A+B)2  की सार्थकता उदरपूर्ति के अलावा नजर नहीं आयी किंतु न्यूटन का तीसरा नियम इन परेशानियों में समान वेग से विपरीत प्रतिक्रिया करने लगा फलस्वरूप फिर जोखिम उठा बुध्दजीवियों एवं दार्शनिकों को 10 वर्षों तक अध्ययन करने का प्रयास किया किंतु किसी ने भी महल और झोपड़ी के असमानता के कारण से मुझे संतुष्ट न कर सका ! सोचा चलो स्वयं ही अपने जीवन दर्शन की खोज में निकल पड़ता हूँ शायद मंजिल मिल जाये और जीवन सार्थक हो जाये !

इसी उधेड़बुन में अकेला ही बिना किसी पूर्वाग्रह और प्राप्ति की आकांक्षा से निकल पड़ा ! रास्ते पर कई मुसाफिर मिले उनमें कुछ फकीर से जीवन की मूलभूत समस्याओं का बोझ लेकर किंतु असीम आत्मिक सुख से परिपूर्ण
,चेहरे पर बेफिक्री का आलम और अलौकिक तेज से परिपूर्ण, जीवन को उत्सव की तरह मनाते हुए भविष्य की परवाह न करते हुए वर्तमान में जीते लोग जिन्हे यांत्रिक दुनिया दलित और पिछड़ा मानते हुए आदिवासी की संज्ञा देती है !

कितनी सटीक संज्ञा है “ आदिवासी “ ! आदिकाल से यही लोग हैं जो जीवन जीने की वास्तविक कला जानते हैं ! किंतु यांत्रिक दुनिया के रहनुमा इन्हे अपने निजी यंत्रों को सुचारू रूप से चलायमान स्थिति में रखने के लिए अब संसाधन की तरह उपयोग करने लगे हैं और उनका वो जीवन उत्सव अब मातम में परिवर्तित हो चुका है !

इन्ही उलझनों के साथ उफाफोह की स्थिति में किसी तरह यात्रा की निरंतरता बना चलता रहा !अचानक
जीवन पथ पर अनचाहे रूप से एक ज्ञानी दीमक से सामना हुआ ! इठलाकर कहने लगा तुम्हारी चाल शास्त्र सम्मत नहीं हैं ! विद्वानो ने तुम्हारे चाल चलने के तरीके को गलत बताया है ! सही तरीका ये है जो मैं चल रहा हूँ ! मैंने उससे पूछा महोदय आप जो कह रहे हैं मैं उसका विरोध नहीं कह रहा हूँ पर आप सही कह रहे हैं इसका आप कैसे दावा कर सकते हैं ! उसने बड़े दम्भपूर्वक कहा थोड़ा परिश्रम करो और फलाँ-फलाँ पोथी पढ़ो !

एक क्षण रूका और सोचा तो ध्यान आया कि ये सारी पोथी
,ये ग्रंथ तो मैंने स्वयं से खिन्न होकर एक आलमारी में बंद कर कई वर्षो से रख छोड़ी हैं ! मन में निश्चय किया कि क्यों न एक बार पुन: देखा जाय दीमक महोदय ने जब इतने आत्मविश्वास से कहा है तो कहीं मुझसे ही कोई गलती नहीं हुई? बरसों बाद उस आलमारी को खोला तो देखा सारी पोथियों को दीमक चाट चुके हैं ! एक वरिष्ठ प्रशासनिक दीमक ने कहा हमारा स्वयंसेवी मानवाधिकारी मार्गदर्शक दीमक आपकी सारी पोथी चाट गया है और कह गया है कि हमारे चाटने के लिए भी कुछ पोथी की व्यवस्था करेगा !

मैंने उनसे कहा आप मेरे अतिथि हैं आपको भूखा रखना मेरे लिए पाप होगा अत: मेरे इस पोथी ज्ञान अर्जन के प्रमाण पत्र जो कुछ ईंटगारों से बने प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदान किये गये हैं तथा जिन्हे मैं अपने जीवन के स्वर्णिम दिनों में अर्जित किया था और इन्हे अमूल्य निधि समझ कर सहेज कर रखा था
,यही शेष है जो अब मेरे किसी उपयोग का नहीं है ! इसे ही भक्षण कर अपनी पिपासा शांत करें !

अतिथियों से विदा लेकर वापस उसी ज्ञानी दीमक के पास लौटा और बड़े विनय पूर्वक कहा महोदय आपने मेरी पूरी पोथी तो चाट ली है एक उपकार और कर दें
, इस मूढ़मति में जो कुछ पोथी ज्ञान बचा हुआ है उसे भी चाट कर खाली कर दे ताकि मैं स्वयं की खोज में बिना किसी पोथी ज्ञान के निकल सकूँ तथा फिर से कोई और ज्ञानी दीमक मुझे भटका ना सके !

बस अब चल पड़ा हूँ सारी पोथी तजकर और अपनी मूढ़मति से सारा पोथी ज्ञान हटाकर कबीर और रैदास के पद चिन्हों पर ! आमंत्रित करता हूँ सभी पथिको को जो मेरी तरह इन सभी को त्यागकर निकल पड़े हैं वास्तविक आनंद की तलाश में बिना किसी महत्वाकांक्षा के ! आईये साथ चले उस मार्ग पर जहाँ जीवन का हर पल अभावों के बावजूद भी उत्सव हैं !! जय हो !! ...

रविवार, 18 सितंबर 2011

मोदी और मीडिया पर अनशन

मोदी के उपवास पर इतनी हाय तौबा क्यूँ ! क्या मोदी ने मीडिया को आमत्रंण भेजा था ! उपवास कर रहा है करने दो ! देश में वैसे भी रोज लाखों लोग भूखे रहते हैं किसे फर्क पड़ता है ! जो लोग इसके पक्ष में हैं वो इसमें अपनी जमीन तलाश रहे हैं और जो विरोध कर रहे हैं उन्हे अपनी जमीन खिसकती दिखाई दे रही है ! आम आदमी को इससे क्या मतलब ! कुछ सरकारी सेक्यूलर लोग टीवी पर लगातार एक ही बात की रट लगा रहे हैं मोदी मे माथे क...ा कलंक नही मिट सकता और जनता उसे कभी माफ नही करेगी ! अरे नही मिट सकता तो न मिटे अपनी बला से और रही बात जनता की तो अगले वर्ष 2012 के विधान सभा नतीजे बतायेंगे कि जनता ने उन्हे माफ किया या नहीं ! बस मेहरबानी कर मोदी को उसके हाल पर छोड़े और अपनी उर्जा महँगाई और आतंकवादी घटनाओं को रोकने में लगायें तो शायद आपके माथे का कलंक मिटे और देश की जनता आपको 2014 में माफ कर दे ! रही बात मीडिया की वो तो अब भाँड हो चुकी है वहीं नाचेगी जहाँ उसे TRP रूपी बख्शीस मिलेगी ! जय हो ...

सोमवार, 12 सितंबर 2011

गाँधी , गाँधीवाद , अहिंसा और अन्ना


कुछ दिनों पहले अन्ना द्वारा कसाब को सरेआम फाँसी दिये जाने के बयान पर गाँधीवादियों ने काफी कोहराम मचाया , अन्ना स्वयं को गाँधीवादी मानते हैं और गाँधीवाद के विरूध्द आचरण करते हैं !

दरअसल गाँधीवाद क्या है ? यह एक क्षद्म आवरण है आज के रहनुमाओं का ! मैंने कभी नहीं सुना गाँधी ने भी कभी गाँधीवाद का पालन किया हो ! अगर ऐसा था तो उन्होने उमर अब्दुल्ला के अफजल गुरू मामले की तरह भगत सिंह की फाँसी का विरोध क्यों नही किया ? गाँधी ने जिस राम को अपना जीवन आदर्श माना उन्ही राजाराम ने रावण, बाली सहित कई वध किये !

रही बात अहिंक होने की तो अहिंसा का अर्थ काफी व्यापक होता है जो कम से कम गाँधी के अहिंसा की परिभाषा से पूर्ण नहीं होता ! अन्ना के आंदोलन एवं आमरण अनशन को अहिंसक आंदोलन कहा जा रहा है लेकिन कितनों के ये पता है कि इस अनशन में अरूण नाम के एक अनशनकर्ता की मृत्यु हो गई तो फिर ये अनशन अहिंसक कैसे हो गया !

बुध्दजीवियों से अपेक्षा है कि जरा सोचें मनुष्य अगर अपनी हत्या स्वयं करने को तत्पर हो तो उससे बड़ा हिंसक और कौन हो सकता है ! आमरण अनशन का क्या अर्थ है , किसी बात पर कोई ये कहे कि अगर उसकी बात नहीं मानी जाती तो वह आमरण अनशन करेगा मतलब आप उसकी बात नहीं मानों तो वो खुद को भूखा रखकर अपनी हत्या स्वयं कर देगा !

अत: मेरे विचार से आमरण अनशन को कभी भी अहिंसक आंदोलन नहीं कहा जा सकता ! लेकिन अहिंसा का अर्थ ये नहीं की आप पर कोई हमला करे तो आप ये कहें आप मुझे मार सकते हैं किंतु मैं अहिंसा का पुजारी हूँ आपको मैं बिरियानी खिलाने के अलावा कोई कार्य नहीं कर सकता ! मजे की बात तो ये है कि जिसे गाँधी टोपी कहकर लोग पहनकर अपने आप को गाँधीवादी कहते हैं उस टोपी को गाँधी ने कभी पहना ही नहीं !

किस गाँधीवाद की बात कहते हैं जिन दलित अछूतों को उन्होने ईश्वर का अंश मानकर “हरिजन” नाम दिया वही शब्द आज उत्पीड़न कहलाता है ! किसी आतंकवादी की फाँसी की सजा को माफ कर हम क्या साबित करना चाहतें हैं ! इससे दो ही स्थिति बनेगी या तो उस व्यक्ति को ताउम्र कैद में रखकर उसे पल पल मौत का एहसास कराया जाय या फिर से कंधार विमान अपहरण जैसे किसी घटना के लिए राह से भटके हुए भाईयों को उत्प्रेरित किया जाय !

दोनों ही स्थिति में जो घटनायें होगीं क्या उसे अहिंसक कहा जा सकता है ! यदि इंडियन मुजाहद्दिन के ईमेल पर यकीन करें तो उन्होने अफजल गुरू के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में धमाके किये हैं ! ऐसी स्थिति में अफजल के लिए सजा-ए-मौत की माफी का आंदोलन अहिंसक है ??????

दरअसल हमारी समस्या ये है कि हम उस व्यक्ति की बातों पर अंधश्रध्दा रखते हैं जो तथाकथित रूप से सफल है चाहे वो गलत ही क्यों न हो और यदि कोई उसकी गलत बातों पर आक्षेप करता है तो हम कहते हैं कुछ भी कहने के पहले उस महान व्यक्ति के बराबर कोई कार्य करो जैसा मेरे एक विद्वान मित्र अक्सर कहते रहते हैं !

अन्ना का कसाब पर दिया गया बयान उनके क्षद्म गाँधीवादी आवरण को फाड़कर एक आम हिंदुस्तानी के मन की पीड़ा है जो कमोवेश अंजाने में ही सही लेकिन बाहर आ गई ! उनके पहले के भी बयानों को ध्यान दें जिन्हे तथाकथित बुध्दजीवियों द्वारा अनर्गल कहा जाता है , मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है कि अन्ना के ह्रदय में एक आम भारतीय आदमी का दिल है जो ज्यादा देर तक किसी क्षद्म आवरण में रह नहीं पाता और रह रह कर उनके बयानों के रूप में गाँधीवादी आवरण से अपनी गर्दन बाहर निकालता रहता है !

रविवार, 28 अगस्त 2011

UPA का आत्मविश्वास

पिछले पाँच दिनों से देश के वरिष्ठ माने जाने वाले पत्रकारों एवं बुध्दजीवीयों के विचारों, वक्तव्यों एवं अनुमानो को बड़ी गँभीरता से तटस्थ भाव से देख एवं सुन रहा हूँ ! सभी ने कमोबेश एक ही गाना गाया बस राग अलग अलग थे ! सरकार की छवि खराब हुई है ! सरकार दबाव में है ! सरकार की फजीहत हो गई !  अन्ना के सामने झुकी सरकार ! सरकार की लोकप्रियता घटी ! कुछ भविष्यवक्ता टाईप के बुध्दजीवी लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि आने वाले विधानसभा चुनावों में काँग्रेस को भारी नुकसान होगा ! भाजपा एवं अन्य विपक्षी दल भी इस गाने को सुनकर ऐसे नाच रहें है जैसे कभी मुन्नी और शीला भी नहीं नाची थीं ! सभी को मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह के जैसे लोगों के बयानों में ओछापन एवं बौखलाहट नजर आ रहा है लेकिन मेरे नजर में ये उनका आत्मविश्वास है और ये आत्मविश्वास शत प्रतिशत सही भी है ! मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि यदि अभी चुनाव हो जाये तो फिर से काँग्रेसनीत सरकार ही बनेगी ! ये कोई हवा हवाई बातें नहीं है इसके पीछे कई ठोस तथ्यपूर्ण कारण है ! उल्टेक्रम में सबसे पहला कारण यह है कि विपक्ष केवल कागज पर है और उसके सारे नीति निर्धारक नेताओं का कोई व्यक्तिगत जनाधार नहीं है ! वे इस उम्मीद में हैं कि लोग काँग्रेस को नकारे और बाई डिफाल्ट उन्हे शासन करने का मौका मिले इसलिए वे आक्रमक नहीं होकर वेट एण्ड वॉच की नीति धारण किये हुए हैं ! दूसरा महत्वपूर्ण कारण काँग्रेस के आत्मविश्वास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस देश की 80% जनता आज भी गाँवों में रहती है जहाँ मीडिया तो छोड़िये बिजली, पानी की भी मूलभूत सुविधा नहीं है वहाँ कितने लोग लोकपाल , अन्ना , कलमाड़ी को जानते हैं और कहीं सुन भी लिया हो तो किसे इससे मतलब है ! चुनाव परिणामों को देखें तो काँग्रेस वैसे भी कभी शहरी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है ! जहाँ इस आंदोलन का ज्यादा प्रभाव है ! इस देश में जहाँ सरकार बनाने के  लिए 20% से 30% वोट पाना ही पर्याप्त है और यह आंदोलन का प्रभाव आज भी कम से कम 60% से 70% वोटरों से अछूता है ! सरकार की लप्फेबाजी सिर्फ नौटंकी है मामले को लम्बा खीचने को ! इस देश में चुनाव के खेल कैसे जीते जाते हैं ये कमोबेश सारे दर्शकों को पता है तो इन माहिर खिलाड़ियों को नहीं पता हो ऐसा कहना सबसे बड़ी मूर्खता होगी !  काँग्रेस के ये बयानबाज इतने मूर्ख नहीं है जितना लोग समझ रहे हैं वे अच्छे से जानते हैं कि चाहे कितनी बड़ी भी आंदोलन खड़ी कर लो अन्ना और उसकी टीम चुनाव लड़्ने से तो रही और यदि लड़ भी ले तो जीतेगें नहीं इसे तो स्वयं अन्ना भी स्वीकार कर चुके हैं ! कुल मिलाकर इन्ही भाजपा और अन्य चिरपरिचित प्रतिद्वंदियों से नूरा कुश्ती होगी ! इन आंदोलनो से अगर थोड़ी बहुत इंकम्बेंसी होती भी है तो फिर राष्ट्रपिता के चित्रवाला रंगीन कागज, सुरा सुंदरी तथा आग्नेय अश्त्रधारी स्वयंसेवक हैं ही ! इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से लोकपाल से ज्यादा चुनाव सुधार का पक्षधर रहा हूँ लेकिन देश के पंजीकृत बुध्दजीवी और रहनुमा मुझ जैसे एक अदने से आदमी की बात माने इतने बेगैरत और मूर्ख तो हैं नहीं आखिर हैसियत और सामाजिक प्रतिष्ठा भी कोई चीज होती है !! जय हो !!

ओरिजनल लोकपाल

मेरा चेला भोलाशंकर आज मुझे अजीब उलझन में डाल दिया है ! जिद लेकर बैठ गया है, बार बार मुझसे यही कह रहा है – “अमूल बाबा को सोमवार को लोकपाल ड्राफ्ट पर भाषण देना है और मुझे लिखने को कहा है ऐसा सुनहरा मौका मैं खोना नहीं चाहता लेकिन आपसे बेहतर कौन लिख सकता है इसलिए आप लोकपाल ड्राफ्ट पर एक अच्छा सा भाषण लिख दीजिए !

अजीब उलझन में हूँ अभी अभी अन्ना को मना कर फुर्सत पाया हूँ ! इतनी जल्दी अब कहाँ से लोकपाल के लिए नया मटेरियल लाऊँ ! अचानक मेरे मोमबत्ती ब्रिग्रेडी दिमाग में आईडिया आया, सोचा भाषण तो अमूल बाबा को देना है क्या फर्क पड़ता है क्या लिखा है बस अलग हट कर कुछ होना चाहिए! गाय का निबंध याद था उसी को बेस बनाकर एक महान भाषण तैयार कर दिया है ! आप भी गौर फरमायें और कुछ अमूलसुझाव हो तो बतायें

लोकपाल एक राजनैतिक पालतू कानून है ! सामान्यत: किसी भी कानून का हाथ पैर सिर और पूँछ होता है लेकिन हमें सभी समाज को साथ लेकर चलना है इसलिए लोकपाल बेसिरपैर का होना चाहिए ! हमारे सामने वैसे तो मुख्य रूप से दो लोकपाल हैं पहला जर्सी लोकपाल दूसरा देशी लोकपाल ! जर्सी लोकपाल जो सरकार का है ! देशी लोकपाल जिसे गाँव के देहाती समाज के लोग तैयार कर जनलोकपाल कह रहे है ! वैसे हमारे पास अन्य दो लोकपाल अरूणा लोकपाल और जयप्रकाश लोकपाल भी हैं जो देखने में तो देशी लोकपाल लगते हैं लेकिन ये जर्सी लोकपाल के क्रासबीड हैं इसलिए इन पर भी विचार किया जाना चाहिए ! सामान्यतया: कोई भी कानून बनाने का हमारा उद्देश्य देश की गरीब जनता को दूध देने हेतु होना चाहिए लेकिन इससे अन्न दाताओं को ये अपने सिंग से घायल न कर दे इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए ! लोकपाल किसी का भी हो उसके चारा खाने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए तथा उसके दूध देने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए और कोई इस हेतु उसे कोई प्रताड़ित नहीं करे इसका समुचित प्रावधान होना चाहिए अत: इसे वैधानिक मान्यता प्रदान किया जाना चाहिए ! लोकपाल देश में कहीं भी किसी की बाड़ी में घुसकर चारा खा सकता है लेकिन वो गोलभवन में न घुस पाये इसके लिए समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए ! अब अगर लोकपाल नियमित चारा खायेगा, तो हो सकता है कभी उसको दूध देने की भी इच्छा हो, ऐसे में जहाँ हम चाहें वो वहीं दूध दे इसके लिए उसे खूँटे से बाँधने के लिए रस्सी भी हमारे पास होना चाहिए और जब देश को उन्नति के रास्ते पर ले जाने का सारा बोझ हमारे कंधों पर है तो हमारा स्वस्थ और सुरक्षित रहना ज्यादा जरूरी है इसलिए लोकपाल अहिंसक हो तथा हमें कोई क्षति ना पहुँचा सके इसका विशेष प्रबंध किया जाय !इन्ही सिध्दांतों पर बना लोकपाल ही देश एवं जनता के हित में होगा ! हमारा हाथ गरीबों के गले पर !! जय हो !!

शनिवार, 20 अगस्त 2011

जनमत और लोकपाल

पिछले पाँच दिनों से देश के वरिष्ठ माने जाने वाले पत्रकारों एवं बुध्दजीवीयों के विचारों, वक्तव्यों एवं अनुमानो को बड़ी गँभीरता से तटस्थ भाव से देख एवं सुन रहा हूँ ! सभी ने कमोबेश एक ही गाना गाया बस राग अलग अलग थे ! सरकार की छवि खराब हुई है ! सरकार दबाव में है ! सरकार की फजीहत हो गई !  अन्ना के सामने झुकी सरकार ! सरकार की लोकप्रियता घटी ! कुछ भविष्यवक्ता टाईप के बुध्दजीवी लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि आने वाले विधानसभा चुनावों में काँग्रेस को भारी नुकसान होगा ! भाजपा एवं अन्य विपक्षी दल भी इस गाने को सुनकर ऐसे नाच रहें है जैसे कभी मुन्नी और शीला भी नहीं नाची थीं ! सभी को मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह के जैसे लोगों के बयानों में ओछापन एवं बौखलाहट नजर आ रहा है लेकिन मेरे नजर में ये उनका आत्मविश्वास है और ये आत्मविश्वास शत प्रतिशत सही भी है ! मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि यदि अभी चुनाव हो जाये तो फिर से काँग्रेसनीत सरकार ही बनेगी ! ये कोई हवा हवाई बातें नहीं है इसके पीछे कई ठोस तथ्यपूर्ण कारण है ! उल्टेक्रम में सबसे पहला कारण यह है कि विपक्ष केवल कागज पर है और उसके सारे नीति निर्धारक नेताओं का कोई व्यक्तिगत जनाधार नहीं है ! वे इस उम्मीद में हैं कि लोग काँग्रेस को नकारे और बाई डिफाल्ट उन्हे शासन करने का मौका मिले इसलिए वे आक्रमक नहीं होकर वेट एण्ड वॉच की नीति धारण किये हुए हैं ! दूसरा महत्वपूर्ण कारण काँग्रेस के आत्मविश्वास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस देश की 80% जनता आज भी गाँवों में रहती है जहाँ मीडिया तो छोड़िये बिजली, पानी की भी मूलभूत सुविधा नहीं है वहाँ कितने लोग लोकपाल , अन्ना , कलमाड़ी को जानते हैं और कहीं सुन भी लिया हो तो किसे इससे मतलब है ! चुनाव परिणामों को देखें तो काँग्रेस वैसे भी कभी शहरी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है ! जहाँ इस आंदोलन का ज्यादा प्रभाव है ! इस देश में जहाँ सरकार बनाने के  लिए 20% से 30% वोट पाना ही पर्याप्त है और यह आंदोलन का प्रभाव आज भी कम से कम 60% से 70% वोटरों से अछूता है ! सरकार की लप्फेबाजी सिर्फ नौटंकी है मामले को लम्बा खीचने को ! इस देश में चुनाव के खेल कैसे जीते जाते हैं ये कमोबेश सारे दर्शकों को पता है तो इन माहिर खिलाड़ियों को नहीं पता हो ऐसा कहना सबसे बड़ी मूर्खता होगी !  काँग्रेस के ये बयानबाज इतने मूर्ख नहीं है जितना लोग समझ रहे हैं वे अच्छे से जानते हैं कि चाहे कितनी बड़ी भी आंदोलन खड़ी कर लो अन्ना और उसकी टीम चुनाव लड़्ने से तो रही और यदि लड़ भी ले तो जीतेगें नहीं इसे तो स्वयं अन्ना भी स्वीकार कर चुके हैं ! कुल मिलाकर इन्ही भाजपा और अन्य चिरपरिचित प्रतिद्वंदियों से नूरा कुश्ती होगी ! इन आंदोलनो से अगर थोड़ी बहुत इंकम्बेंसी होती भी है तो फिर राष्ट्रपिता के चित्रवाला रंगीन कागज, सुरा सुंदरी तथा आग्नेय अश्त्रधारी स्वयंसेवक हैं ही ! इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से लोकपाल से ज्यादा चुनाव सुधार का पक्षधर रहा हूँ लेकिन देश के पंजीकृत बुध्दजीवी और रहनुमा मुझ जैसे एक अदने से आदमी की बात माने इतने बेगैरत और मूर्ख तो हैं नहीं आखिर हैसियत और सामाजिक प्रतिष्ठा भी कोई चीज होती है !! जय हो !!

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

कृषि दर्शन

एक गाँव का किसान चार दिन से मेरा दिमाग खा रहा है !  नया नया जूस कम्पनी का  मोबाईल  खरीदा है ! फ्री टॉक टाईम का पूरा उपयोग कर मेरा और अपने मोबाईल दोनो का जूस  निकाल रहा है ! आज फिर उसने सुबह सुबह मेरा दिमाग चाटा, पूछने लगा महाराज, ये अन्ना अन्ना क्या है ! (गाँव के लोग मुझे महाराज कहते हैं अपुन भी कोई आम आदमी नहीं हैं ) मैंने सोचा चलो उसकी बुध्दि के अनुसार समझा देता हूँ तो कह दिया महात्मा गाँधी को जानता है न ! ये उसी का फोटो कापी है ! गाँव का किसान अनपढ़ होता है लेकिन मूर्ख नहीं ! उसने तुरंत दूसरा प्रश्न दाग दिया बोला महाराज लेकिन वो गाँधी डोकरा तो लँगोटी पहनता था और ये तो नेता टाईप का कुर्ता धोती ! फिर ये उसका फोटो कापी कैसे हो गया ? मैंने उसके कहा सुन भोला शंकर , वो पुराना गाँधी का क्या नाम था “मोहन” और ये गाँधी का नाम है “केशव” अब दोनो नाम कृष्ण भगवान के ही नाम हैं ! दोनों कृष्ण हमारे जमाने के हैं इसलिए बाँसुरी नही,  पूँगी बजाते हैं ! पुराने वाला गाँधी भी मरते दम तक खाना नहीं खाऊँगा कह के गोरे अंग्रेजों को धमकाता था ! ये नया गाँधी भी वैसे ही भूखा रहकर “काले अंग्रेजों” को धमकाता है ! तू लँगोटी पर ज्यादा ध्यान मत दे ! वो मोहन गाँधी लँगोटी पहनता था लेकिन ये केशव गाँधी थोड़ा दूसरे टाईप का गाँधी है लंगोटी पहनने में नहीं नेताओं का उतारने का काम करता है ! अब कोई पहने या उतारे क्या फर्क पड़ता है, मतलब तो तुझे लँगोटी से ही है ना ! भोला शंकर भी जोंक से कम नहीं है बोला महाराज वो सब तो ठीक है पर इसको अन्ना अन्ना क्यों बोलते हैं ! अब मेरा माथा गरम हो गया, अबे ओ भोले बाबा के चिलम , तू खेत में क्या उगाता है ! वो बोला गन्ना ! गन्ना उगाकर क्या करता है उखाड़ कर बेच देता है न ! हाँ महाराज ! तो सुन और समझ जा –
जिसको सरकार उखाड़ कर चूस ले उसको कहते हैं गन्ना ! 
जिसका सरकार कुछ उखाड़ न सके को उसको कहते है अन्ना !!
!! जय हो !!

रविवार, 14 अगस्त 2011

राशिद अल्वी का ब्लेकमेल


आज मेरा चेला बड़ी हड़बड़ी में हाँफता हुआ मेरे पास आया और कहने लगा कि नाहक ही राशिद अल्वी भाईजान बातों का बखेड़ा खड़ा कर रहें ! कह रहें हैं कि अन्ना सरकार को ब्लेक मेल कर रहे हैं ! अब रमजान के महीने में वो सफेद झूठ कैसे कह सकते हैं ! मैंने चेले से कहा तुम बड़े ही नासमझ हो ! बार बार कहता हूँ किसी विद्वान की कोई बात समझ में नहीं आती तो मुझसे पूछ लिया करो ! अल्वीभाई जान को हम बहुत पहले से जानते हैं वे बड़े सुलझे हुए बुध्दिमान व्यक्ति हैं और उसूलों के पक्के ! कई बार देश हित मे अपने हितों को त्याग कर पार्टी बदली है लेकिन चरित्र नहीं बदला ! वो बिल्कुल सही कह रहे हैं ! चेला गुस्से का घूँट पीकर नाराजगी मिश्रित करते हुए निवेदन की श्रेणी मे कहा तो क्या अन्ना सरकार को ब्लेक मेल कर रहे हैं ? हमने भी हमारे मोमबत्ती ब्रिगेड समाज के महापुरूष स्वामी अग्निवेश का चरित्र को आत्मसात करते हुए कहा नहीं ये भी सत्य नहीं है ! दरअसल दोनो अपनी जगह सही हैं ! तुम्हारा बोध इतना उच्चस्तरीय नहीं है कि इसे समझ सको ! चेले ने पूरी तरह आत्मसमर्पण करते हुए कृतज्ञ भाव से चरणो में बैठकर पूछा माईबाप जी बताईए इसका क्या मतलब है ! हमने कहा- वत्स, अन्ना ने प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखी कि नहीं ? चेला ने कहा- हाँ वो चिठ्ठी तो मेरे पास भी है ! तो मुझे ये बताओ ये चिठ्ठी तुमको इतनी जल्दी कैसे मिली और ये किस रंग की स्याही से लिखा गया है !  चेले ने कहा ये मुझे ई मेल से मिला तथा इसकी स्याही का रंग का तो मुझे पता नहीं  लेकिन मैंने लेजर प्रिंटर से निकाला है तो ब्लैक कलर में है ! हमने कहा सुन मेरे भाई इस देश के प्रधानमंत्री के कार्यालय में तेरे से ज्यादा तकनीक की व्यवस्था है वहाँ भी ये चिठ्ठी डाकिये द्वारा नहीं मेल से ही भेजी गई होगी और प्रिंट शायद कलर टोनर खत्म हो जाने के कारण ब्लैक स्याही में हुआ होगा ! तो जब ब्लैक स्याही में कोई मेल आयेगा तो इसे क्या कहेंगे “ब्लैक मेल” ही ना ! इसमें हायतौबा मचाने की क्या जरूरत है ! अब समझा लेकिन तु मेरा चेला है इसलिए  बता रहा हूँ वास्तव में ब्लैकमेलिंग क्या होती है - किसी की कमजोर नस दबाना और अपनी बात मनवाना ! अब अन्ना भी तो भ्रष्टाचार की नस दबा कर जनलोकपाल पास करने को कह रहा है और दूसरी बात राशिद अल्वी कांग्रेस नेता है तो जब कांग्रेस के मंच पर बैठते हैं तो धर्मनिरपेक्ष हो जाते हैं सिर्फ़ कांग्रेस धर्म होता है और मम्मी देवी ! अब किसी के धर्म और देवी पर संकट आयेगा तो वह कैसे चुप रहेगा ! लेकिन सुन इसे मत लिखना क्योंकि सरकार से हम मोमबत्ती ब्रिगेड को बहुत अनुदान मिलता है ! हम उनका नमक खाते हैं और नमक हराम होना अच्छी बात नहीं है ! जो पहले बताया है वही लिखना ! चेला बोला ठीक कह रहे हो सर अभी जाकर इसे आर्टिकल के रूप में लिखता हूँ ! ऐसा कोई भी नहीं लिख पायेगा , मुँहमाँगा रकम मिलेगा !! जय हो !!

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

“ दाग हैं पर अच्छे हैं “

राजमाता के परिवार में वाद विवाद चल रहा है –
कामवाली टीवी बाई ने हमें आँखोदेखा हाल सुनाया ! 

हरी काँगू – मेरी कमीज में दाग नहीं है! “ हमारा हाथ गरीबों के साथ” , ये गरीबों की कमीज है इसलिए तुम गरीब विरोधी लोगों को 
मटमैली नजर आ रही है पर तुम्हारी कमीज में भी तो दाग हैं !

लाल कमल – पर मेरी कमीज तेरी कमीज से ज्यादा सफेद है ! वो तो मैं खदान गया था वहाँ धूल लग गया ये दाग नहीं है !

हाथी मल –  ये परबल लोगों की फितरत है , दबे कुचले लोगों का मजाक ही बनाते हैं! हमारी कमीज में ये दाग नहीं है दवाई का सिरप गिर गया है ! क्या दबे कुचले लोगों को दवाई पीने का भी अधिकार नहीं है ?

जददू कुमार -  विकास करना हमारा परमधर्म है ! जमीन से जुड़े हैं इसलिए मिट्टी का दाग लग गया है तो इसमें गलत क्या है !

इतने में संसदमहल से बड़ी माता की आवाज आयी - सब चुप हो जाओ तुम सब चुने हुए मेरे संवैधानिक औलाद हो ! कुछ नहीं होता सुपर रिन है ना,  जनता के मन से धो डालेंगे !


बाहर आकर बड़े गर्वपूर्वक कहा – “ दाग हैं पर अच्छे हैं “ 

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

फेसबुक व्यथा

कैसे कैसे जिन्न आ गये फेसबुक पर भाई
Status पर अगड़म बगड़्म कुछ भी करत लिखाई  

श्याम लिखा था स्याह समझ ली
अंधियारे को रात समझ ली
गिरनार को गिरी नारी समझ कर
गुलबदन के बदन को ही गुल
करते हैं गोसाई



गोरी ने बस उफ्फ्फ लिक्खा था
युवकों का दिल मचल उठा था
भरी दोपहरी एक आह भरा था
Comments तो ऐसे करते हैं
जैसे हों घर जमाई  

मेरे आह पर तेरी वाह है
पर मुझको भी यही चाह है
तुने मेरे मन की  पीड़ा
कैसे जान ली  भाई
दिल से दुआ है तेरी
भला करें रघुराई